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जम्मू में इबोला वायरस का खतरा, सतर्कता बढ़ाई गई

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पश्चिम अफ्रीका में महामारी का रूप ले चुके जानलेवा इबोला वायरस से जम्मू को खतरा बढ़ गया है। इबोला के फैलने की आशंका के तहत रियासत में सतर्कता बढ़ाई गई है।
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इसके लिए स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जीएमसी में स्वाइन फ्लू की दस्तक के बाद पहले ही आइसोलेट यूनिट सक्रिय रहा है।

जम्मू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता के अनुसार इबोला वायरस पर शीघ्र ब्ल्यूएचओ की ओर से गाइड लाइन जारी होने की उम्मीद है। एहतियात के तौर पर संदिग्ध मरीजों के लिए आइसोलेट चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
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वायरस से निपटने में काफी पीछे हम

रियासत में ऐसे कई इलाके हैं, जहां से भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों का आना-जाना होता है। इसमें चक्का दा बाग (पुंछ) और कमान पोस्ट, उड़ी (बारामुला) में लोग निर्धारित दिनों में इस और उस पार जाकर अपने रिश्तेदारों से रूबरू होते हैं।

इससे पहले पोलियो जैसे वायरस से निपटने के लिए राज्य से उस और इस पार आने वाली निर्धारित जगहों पर लोगों को वैक्सीन पिलाने की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया था।

हालांकि राज्य का स्वास्थ्य महकमा आधुनिक उपकरणों के लिहाज से ऐसे वायरसों से निपटने के लिए काफी पीछे है।

स्वास्थ्य विभाग जम्मू के उपनिदेशक हेडक्वार्टर डा. गुरजीत सिंह का कहना है कि ऐसे में वायरस के किसी भी तरह किसी देश में पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में एहतियातन सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।
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जानिए, इबोला के लक्षण

तेज बुखार, सिर में दर्द, घुटनों और मांसपेशियों में दर्द, खांसी, कमजोरी, मैदे में दर्द। इबोला वायरस एक फ्लू या अन्य रोग की तरह बढ़ता है। जिसके लक्षण दो से 21 दिन के भीतर दिखना शुरू हो जाते हैं।

यह हवा, पानी और खाद्य पदार्थ से नहीं फैलता है। इसमें वायरस सक्रिय होने पर शरीर के भीतरी हिस्सों में खून का रिसाव होना, आंखों, कान और नाक से खून आना, उल्टी के साथ खांसी में खून आना आदि शिकायत होती है।

ऐसे लक्षण पाए जाने पर पीड़ित के खून की जांच से इबोला वायरस की पुष्टि होती है।
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