जम्मू एयरपोर्ट से उड़ानों का परिचालन करने के लिए कोहरे और खराब मौसम की अब सटीक जानकारी मिलेगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम स्थापित कर दिया है। जल्द ही उच्च स्तरीय टीम इसका ट्रायल करेगी, जिसके बाद इसे शुरू कर दिया जाएगा। आईएलएस से 800 मीटर विजिबिलिटी होने पर भी उड़ानें करवाई जा सकेंगी, जबकि वर्तमान में न्यूनतम 1200 मीटर विजिबिलिटी पर ही उड़ानें होती हैं।
अक्तूबर तक यह आईएलएस जम्मू एयरपोर्ट पर शुरू हो जाएगा। वर्तमान में इसकी स्थापना पूरी हो गई है। दिल्ली से एक टीम इसका निरीक्षण करेगी। इसमें देखा जाएगा की विमान कितनी दूरी से लैंड कर सकता है। -पीएस ब्यूरियां, निदेशक, जम्मू एयरपोर्ट
ऐसे काम करेगा आईएलएस
इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) भूमि पर स्थापित इलेक्ट्रॉनिक प्लेट संपर्क प्रणाली होती है, जो विमान को उड़ान पट्टी पर पहुंचते हुए और लैंडिंग के समय सटीक मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है। इसमें रेडियो संकेतों के संयोजन एवं कई स्थानों पर उच्च-तीव्रता के प्रकाश किरणों का प्रयोग किया जाता है ताकि निम्न दृश्यता, खराब मौसम, हिमपात, उड़ान प्रतिबंधों आदि के रहते हुए भी विमान की सुरक्षित लैंडिंग हो सके।