संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग की साप्ताहिक थिएटर शृंखला संडे थिएटर में रविवार को हिंदी नाटक जब पापा बच्चे थे का मंचन किया गया। रूसी लेखक और कवि अलेक्जेंडर रस्किन की लघु कहानी वेन डैडी वॉज ए लिटिल बॉय पर नाटक आधारित था। इसका हिंदी रूपांतरण और निर्देशन नीरज कांत ने किया।
अक्सर बच्चों के लिए पिता को छोटे बच्चे के रूप में कल्पना करना कठिन होता है। उनके मन में जिज्ञासा होती है कि जब पापा छोटे बच्चे होंगे तो कैसे होंगे। कहानी में इंसान की सोच और उसके बदलते विचारों को दर्शाया गया है।
नाटक की शुरुआत होती है जहां एक लड़की पिता की कहानी सुनाती नजर आती है। एक बच्चे से पूछा जाता है कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है? बोलता है कि चौकीदार। एक दिन बाजार में आइसक्रीम खाते समय बच्चे के मन में आइसक्रीम बेचने वाला बनने का विचार आता है। दूसरे दिन रेलवे स्टेशन पर शंटिंग मैन, अगले दिन पायलट, फिल्म देखते के वक्त एक्टर और चरवाहा बनने का ख्याल आता है। उसके बदलते विचारों को सुनकर हर कोई हंसता है।
लेकिन कुत्ता बनने का विचार पालतू के पास बैठकर यह सीखने के लिए प्रेरित करता है कि अपने पैर से कान को कैसे खुजाना है। सिपाही के पूछने पर कि वह कुत्ता बनना क्यों सीख रहा है, जवाब देता है कि काफी समय से इंसान बनकर रह रहा है। सिपाही पूछता है कि क्या तुम जानते हो कि इंसान क्या होता है, वह कहता है कि नहीं। इसके बाद उसे समझ आता है कि वह हर रोज मन नहीं बदल सकता। उसे यह अहसास होता है कि पहली चीज जो वह बनना चाहता है वह एक इंसान है।
कलाकारों में संकेत भगत, अबीर बेरी, अदविक शर्मा, महक चिब, सांची दत्ता, सोनाली शर्मा और प्रियाल गुप्ता शामिल थे। नाटक का प्रचार-प्रसार वंशिका पंडोह ने किया। नाटक की लाइटें व डिजाइन नीरज कांत, संगीत चिराग आनंद, प्रस्तुतियां ब्रिजेश अवतार शर्मा और शो का संचालन मोहम्मद यासीन ने किया।