जहां चाह, वहां राह। दस हजार से 17 हजार फुट तक की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख के स्कूल अभावों के बीच पढ़ाई की तकनीक से नजीर बन गए हैं। दूरदराज स्कूलों में कहीं बिजली नहीं है तो कहीं इंटरनेट की समस्या है। इसके बावजूद बच्चे डिजिटल लैब से पढ़ाई कर रहे हैं। लद्दाख प्रशासन की ओर से शुरू की गई डिजिलैब पायलट परियोजना के तहत 200 स्कूलों में डिजिलैब स्थापित की गई हैं।
मंगलवार को 27 स्कूलों के मुख्य अध्यापकों और शिक्षकों के लिए डिजिलैब ऑपरेशन का दो दिवसीय प्रशिक्षण पूरा हुआ। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह ने जिले के सभी स्कूलों में डिजिलैब स्थापित की हैं। इसमें शिक्षा विभाग, सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर 17000 फुट फाउंडेशन परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है।
सौर ऊर्जा से चलता है ऑफलाइन सिस्टम
दूरदराज के स्कूलों में स्थापित डिजिलैब पूरी तरह से ऑफलाइन सिस्टम है। यानी इसके लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं है, लेकिन इस सिस्टम से पढ़ाई कर रहे बच्चों को ट्रैवलिंग कनेक्टर एप का इस्तेमाल कर क्लाउड कनेक्टिविटी से मॉनीटर किया जाता है। 12 वोल्ट क्षमता का सिस्टम सौर ऊर्जा से चलता है। यह लर्निंग एप बच्चों के पढ़ने-सीखने की क्षमता के अनुसार काम करता है। पढ़ाई के कंटेंट को हेडमास्टर जोनल कार्यालय में जाकर अपडेट करते हैं।
डिजिलैब को खास तौर पर लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए 17000 फुट फाउंडेशन ने तैयार किया है। शिक्षक इसका संचालन सीखकर दूरदराज के बच्चों को भी बेहतर अध्ययन करवा रहे हैं। इसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। - सेरिंग अंगचुक, उपाध्यक्ष लेह परिषद
शिक्षा सुधार में देशभर में अव्वल
शिक्षा में व्यापक सुधार के लिए प्रदेशों के प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक (परफॉर्मेंस ग्रेडिंग रिपोर्ट) में लद्दाख देश भर में अव्वल रहा है। हाल ही में जारी की गई वर्ष 2020-2021 की रिपोर्ट में लद्दाख को 844 अंक मिले। एक साल में इतने अंकों का उछाल देश भर में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आंका गया है।