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इराक से लौटे दीदार की दहलाने वाली कहानी

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इराक में काम करने गए दीदार सिंह मुद्दत के बाद घर पहुंचे। इराक में जारी आईएसआईएस के आतंकवाद के बीच से बचकर आए दीदार को देखकर घर वालों की आंखे नम हो गई।
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अपने बेटे को देखकर मांग की खुशी का ठिकाना नहीं रहा तो बच्चे भी पापा की घर वापसी पर खुशी से झूम उठे।

दीदार ने कुछ दिन पहले दिल्ली पहुंचने के बाद जल्द घर आने की बात परिवार को बताई थी।

जैसे ही वह घर पहुंचे, तो परिवार और गांव कलोयं के लोगों में खुशियों की लहर दौड़ गई।
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'बेरहमी से लोगों को मौत के घाट उतारा'

दीदार ने बताया कि इराक के बसरा शहर की मुख्य स‌िटी में मनहिल कंपनी में काम कर रहे थे कि अचानक इराक सहित बसरा शहर में हालत खराब होने का पता चला। इसके बाद से हर वक्त दहशत में रहे।

एक समय लगा कि अब शायद ही यहां से जिंदा घर वापसी होगी। शहर सहित आसपास में संघर्ष के दौरान बेरहमी से लोगों को मौत के घाट उतार दिए जाने के मंजर ने मन को अशांत कर दिया था।

'छह दिन तक अन्न का दाना भी नसीब नहीं'

डर और दहशत के माहौल के बीच जैसे-तैसे एक-एक दिन कट रहे थे। परिवार के सदस्यों से बातचीत भी नहीं हो पा रही थी। बसरा शहर में एक समय ऐसी स्थिति भी सामने आई कि छह दिनों तक अन्न का एक दाना भी नसीब नहीं हो पाया।

वह दिन शायद ही कभी भूल पाऊंगा। मौत सामने दिख रही थी, लेकिन कंपनी के लोगों ने भरोसा दिया कि घबराने वाली कोई बात नहीं।

गैस सिलेंडर के जरिए ध्वस्त कर रहे भवन

दीदार ने बताया कि हमला करने वाले गैस सिलेंडर के जरिए भवनों को ध्वस्त कर रहे थे। बाद में भारत सरकार द्वारा इराक के विदेश मंत्रालय से बात करने पर उन्हें भरोसा हुआ। कंपनी से 1300 डालर का वेतन लेना था, लेकिन 800 डालर ही मिल सके।

हमलावरों ने जब कहा कि उनकी लड़ाई भारतीयों से नहीं तब वहां काम करने गए लोगों ने राहत महसूस की।

दीदार सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने दिल्ली तक का खर्च उठाया, लेकिन उसके बाद अपने खर्च पर घर पहुंचा। उन्होंने कहा कि अब कभी ऐसी जगहों पर नहीं जाना चाहेंगे।
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घर पहुंचते ही परिवार ने घेर लिया

दीदार के घर पहुंचने पर दोनों बेटे सर्वजीत (10) और परविन्द्र सिंह(8) सहित पत्नी सुरजीत कौर, पिता भजन सिंह, मां जीतो देवी और रिश्तेदारों ने घेर लिया और देर तक हालचाल जानते रहे।

दीदार दोनों बेटों के लिए खिलौने और परिवार के लिए कपड़े भी वहां से लेकर पहुंचे थे।

पत्नी सुरजीत कौर ने कहा कि वह हर वक्त भगवान से सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रही थी, भगवान ने उसकी सुन ली।
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