श्रीनगर। कश्मीर शिल्प और ब्रांड प्रमोशन की मौलिकता को सुरक्षित रखने के लिए भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री चेन्नई ने कश्मीरी कालीन के लिए नया लोगो जारी किया है। यह कदम जीआई प्रक्रिया के तहत उठाया गया है। जीआई लोगो उन उत्पादों पर इस्तेमाल किया जाता है, जिनका विशेष भौगोलिक मूल है।
भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) नौशेरा के निदेशक जुबैर अहमद ने बताया कि जीआई रजिस्ट्रार की ओर से नया रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र और नया लोगो जारी किया गया है, जो इस तरह के मानकों को सौंपने के लिए सक्षम प्राधिकरण है। नया लोगो व्यापक प्रचारित किया जाएगा, ताकि कश्मीर में हाथ से बने कालीन की विशिष्टता सुनिश्चित की जा सके और खरीदारों को असली कश्मीरी कालीन खरीदने की संतुष्टि प्राप्त हो। हाथ से बने कालीन के अलावा, छह अन्य कश्मीरी शिल्प पहले ही जीआई रजिस्ट्रर्ड हो चुके हैं। इनमें पश्मीना, कानी, सोजनी, खतबंद और अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी शामिल हैं। संवाद