-जम्मू-कश्मीर को बरसात के जख्मों से जल्द राहत दे सकते हैं केंद्र के आदेश
- आपदा के बाद बढ़ेगी राहत पहुंचाने की गति
- पहले योजना तैयार होने से हादसे नियंत्रित होने की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश सरकार को आपदा प्रबंधन में बड़ी मदद मिल सकती है। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर समेत सभी राज्यों को 90 दिन में आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना के तैयार होने के बाद प्रदेश को केंद्र से फंडिंग होगी। योजना पहले से तैयार होने से सीजन खत्म होते ही नुकसान की भरपाई भी शुरू हो जाएगी।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर भविष्य में इस बदलाव को लागू किया जाएगा।
समय में सीजन के नुकसान की भरपाई को पांच से छह महीने लग रहे हैं। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाती है। केंद्र सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर नुकसान का जायजा लेने के लिए एक टीम दिल्ली से भेजती है। इस टीम के सर्वे की रिपोर्ट केंद्र में जमा होने के बाद रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के अनुसार भुगतान किया जाता है। अब नए प्रावधान के बाद प्रदेश में आपदा प्रबंधन योजना पहले से तैयार रहेगी। इससे आपदा संभावित जगह का चयन पहले कर लिया जाएगा और नुकसान के बाद केंद्र से मिलने वाली मदद भी बिना देरी के मिल सकेगी।
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रामबन में हुई थी भीषण तबाही
बीते अप्रैल माह में भारी बारिश से रामबन इलाके में भारी तबाही हुई है। यहां तीन लोगों की मौत के अलावा करीब एक हजार मवेशियों के बह जाने, 496 भवनों को नुकसान, 46 स्कूल भवन, 80 हजार कनाल भूमि के प्रभावित होने, 27 पेयजल योजनाओं के बर्बाद होने समेत नेशनल हाईवे को नुकसान पहुंचा था। आपदा कि वजह से 69 परिवारों को एनएचपीसी काॅलोनी में ठहराया गया था। इन प्रभावित परिवारों को अभी तक पूरी मदद नहीं मिल पाई है।
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शहर में होगा बाढ़ प्रबंधन, जम्मू-श्रीनगर को मिलेगा फायदा
-प्रारंभिक चेतावनी, बाढ़ प्रबंधन, आपदा के बाद आवश्यकता का आकलन और आपदा प्रतिक्रिया बल की भूमिका पर होगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहरों को बाढ़ से बचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी। जम्मू-कश्मीर में इसका सबसे बड़ा फायदा होने वाला है। प्रदेश का जम्मू शहर तवी के तट पर है तो श्रीनगर झेलम के किनारे बसा है। इन दोनों बड़े शहरों के अलावा चिनाब के किनारे बसे रामबन समेत दूसरे छोटे शहर भी हैं। दिल्ली में दो दिन तक लगातार चले महामंथन के बाद चार बातें बाहर आई हैं। इनमें प्रारंभिक चेतावनी, शहरी बाढ़ प्रबंधन, आपदा के बाद आवश्यकता का आकलन और आपदा प्रतिक्रिया बल की भूमिका शामिल है। आपदा प्रबंधन पुनर्वास प्राधिकरण प्रारंभिक चेतावनी पर काम करेगा। सही समय पर आपदा की जानकारी से नुकसान को कम करने के प्रयास किए जाएंगे।
इसके निर्देश दिल्ली में प्रधानमंत्री के प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डा. पीके मिश्रा ने दिए हैं।
इनसेट...
बिजली गिरना सबसे ज्यादा जानलेवा
दिल्ली में महामंथन के दौरान बिजली गिरने की घटनाओं को आपदा का बड़ा रूप माना गया है। भविष्य में बिजली गिरने से होने वाली मौत के मामले में उचित मुआवजे से उपचार तक के साधन विकसित किए जाएंगे। खासतौर पर प्रारंभिक चेतावनी के दायरे में भी इस घटनाक्रम को लाया जाएगा। ताकि हादसा होने से पहले उन इलाकों की पहचान की जा सके, जहां बिजली गिरने की संभावना ज्यादा हो। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने राज्यों को इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।