फेस्टिवल सीजन में डेंगू के डंक ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। धनतेरस और दिवाली से पहले जम्मू में ही सैकड़ों लोग डेंगू से पीड़ित हैं। शहर के कई इलाके डेंगू से हॉट स्पॉट बने हुए हैं। प्रदेश में वीरवार को इस सीजन में चौबीस घंटे में सर्वाधिक 232 डेंगू के मामले मिले हैं। दैनिक आधार पर औसतन 150 से 180 नए मामले मिल रहे हैं।
जम्मू शहर के प्रमुख अस्पतालों में डेंगू के संदिग्ध मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कई वार्डों में हालत यह हो गई है कि एक बेड पर दो-दो मरीजों को रखना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पारा अधिक गिरने पर ही डेंगू से राहत मिलेगी। डेंगू से अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है।
शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में डेंगू वार्ड बनाया गया है, लेकिन डेंगू के संदिग्ध मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ गई है। इस 50 बिस्तर वाले वार्ड में वर्तमान में 76 डेंगू व डेंगू से संदिग्ध बाल रोगी भर्ती हैं। अस्पताल में दैनिक आधार पर औसतन 25 से 30 डेंगू के संदिग्ध मामले पहुंच रहे हैं, जिसमें 10 से 15 की पुष्टि हो रही है। गत बुधवार को अस्पताल में 26 मामले पहुंचे, जिसमें 13 पाजिटिव मिले। जम्मू के रिहाड़ी, सरवाल, जानीपुर और पलौड़ा इलाके डेंगू से हाट स्पाट बने हुए हैं। इन इलाकों में 85 प्रतिशत तक डेंगू के मामले मिले हैं।
मरीजों के उपचार के लिए जीएमसी में सभी प्रबंध
जीएमसी की प्रिंसिपल डा. शशि सूदन के अनुसार बच्चों में 80-90 और व्यस्कों में 50 से 60 प्रतिशत संदिग्ध मरीज रोज भर्ती हो रहे हैं। डेंगू से निपटने के लिए हमें अपने वातावरण में गैरजरूरी पानी स्थलों को ड्राई करना जरूरी है। इसके लिए बच्चों से लेकर बड़ों तक को जागरूक होना होगा। इसे युद्धस्तर पर एक अभियान की तरह चलाया जाए। उनका दावा है कि डेंगू के मरीजों के उचित उपचार के लिए जीएमसी में सभी प्रबंध किए गए हैं। डेंगू की रोकथाम इलाज से बेहतर है।
फीवर क्लीनिक में देखा जा रहा संदिग्ध मरीजों को
जीएमसी के पीएंडएसएम विभाग के एचओडी डा. राजीव गुप्ता ने कहा कि डेंगू एक वायरस के कारण होता है, जो ज्यादातर एडीज एजिप्टी प्रजाति के मादा मच्छरों के काटने से फैलता है। तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी, सूजी हुई ग्रंथियां, मांसपेशियों, जोड़, हड्डी में दर्द डेंगू के लक्षण हैं। मेडिसिन विभाग के एचओडी डा. फैयाज वानी ने बताया कि जीएमसी में फीवर क्लीनिक चलाई जा रही है। इसमें डेंगू के संदिग्ध मरीजों को देखा जा रहा है।
एक ओर दावे, दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों में ही जमा पानी
सरकार डेंगू से निपटने के लिए सभी उचित प्रबंध करने के दावे कर रही है, लेकिन दूसरी ओर कई सरकारी कार्यालयों के परिसरों में डेंगू पनप रहा है। इन परिसरों में विभिन्न कारणों से पानी जमा होकर मच्छरों को पनपने में मदद कर रहा है। बिक्रम चौक स्थित एसआरटीसी यार्ड में कई पुराने वाहन खड़े हैं, जिन पर पानी जमा है। इसी तरह कई जगह पड़े टायर भी लारवा को पैदा करने में मदद कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर की सबसे बड़ी अनाज मंडी वेयर हाउस में भी विभिन्न स्थानों पर ऐसे ही हालात हैं। कई जगह खुले टायरों में पानी जमा पड़ा है। इसी तरह कई पुलिस स्टेशनों के बाहर पड़े वाहन भी लारवा को पैदा कर रहे हैं। सालों से पड़े ऐसे वाहनों में कहीं न कहीं पानी जमा है। कई सरकारी विभागों के कर्मचारी भी डेंगू से पीड़ित हुए हैं, जिससे साफ है कि सरकारी परिसरों में भी पूरी तरह से साफ सफाई नहीं रखी जा रही है।
बारिश बढ़ा रही खतरा
मानसून के बाद हो रही बारिश डेंगू के लिए अधिक खतरा बढ़ा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार संभावित जलस्थलों पर पानी इकट्ठा होकर लारवा को पैदा करने में मदद कर रहा है। वर्तमान में 15 से 25 डिग्री के बीच का तापमान लारवा के लिए अनुकूल बना हुआ है। इससे नए मच्छर पैदा हो सकते हैं।
तिथि कुल मामले दैनिक
- 18 अक्तूबर 3446 81
- 19 अक्तूबर 3617 171
- 20 अक्तूबर 3849 232