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जम्मू-कश्मीर : हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए अल्ताफ और मुदासिर के परिजनों का प्रदर्शन

Thu, 18 Nov 2021 06:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर। 

सार

दोनों के शव सौंपे जाने की मांग, रामबन में निषेधाज्ञा लागू। फारूक ने किया ट्वीट, कहा- शव दिलवाने में मदद करें।
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परिजनों ने किया हंगामा... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हैदरपोरा मुठभेड़ को लेकर विवाद हो गया है। मुठभेड़ में मारे गए मकान मालिक अल्ताफ भट व मुदासिर गुल के परिजनों ने बुधवार को प्रेस एन्क्लेव में विरोध प्रदर्शन कर दोनों के शव उन्हें सौंपने की मांग की। परिवार वालों का आरोप है कि दोनों आतंकवादी या उनके मददगार नहीं थे। इस बीच रामबन निवासी स्थानीय आतंकी मोहम्मद आमिर के हैदरपोरा में मारे जाने पर विरोध की आशंका के बीच प्रशासन ने रामबन के कुछ हिस्से में धारा 144 लागू कर दी है। उधर नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से आग्रह किया है कि वह इन लोगों के शव उनके परिजनों को दिलवाने में मदद करें। एलजी ने उनकी मांग पर गौर करने का आश्वासन दिया है।   

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पत्रकारों से बात करते हुए, अल्ताफ भट के भाई अब्दुल मजीद ने कहा कि एक नंबरदार (राजस्व अधिकारी) के रूप में, वह लगातार पुलिस के संपर्क में रहता है और अगर उसका भाई आतंकवाद में शामिल होता तो वे उसे सूचित करते। अल्ताफ पिछले 30 साल से हैदरपोरा बाईपास में कारोबार कर रहा था। उन्होंने भवन किराए पर दिया और हमने उनका (किरायेदारों का) सत्यापन पुलिस स्टेशन सदर में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा कि अगर कुछ गलत होता तो पुलिस को हमसे संपर्क करना चाहिए था। 

मजीद ने कहा कि उसका भाई एक बिल्डर और करदाता था। उन्होंने कहा कि पुलिस उसे जानती थी, वे हर दिन उसके घर जाते थे। घटना वाले दिन टास्क फोर्स के लोग उसके भाई को इमारत में तलाशी के लिए तीन बार ले गया। इसी दौरान वह गोलियों का शिकार हो गया। उन्होंने एलजी से आग्रह किया कि वह घटना की जांच कराएं अगर मेरा भाई दोषी है तो मैं हर सजा के लिए तैयार हूं। दूसरी ओर अपनी इसी मुठभेड़ में मारे गए एक अन्य कारोबारी मुदासिर गुल की पत्नी हुमैरा मुदासिर अपनी एक साल की बच्ची इनाया मुदासिर के साथ वहां पहुंचीं और एलजी से न्याय की मांग की।
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क्या कहती है पुलिस 
इसके विपरीत पुलिस का दावा है कि हैदरपोरा में चार लोग मारे गए। जिसमें एक पाकिस्तानी आतंकवादी बिलाल और उसके स्थानीय सहयोगी मोहम्मद आमिर के साथ दो नागरिक अल्ताफ भट और मुदासिर गुल शामिल हैं। अल्ताफ उस मकान का मालिक है जिसमें अवैध रूप से काल सेंटर चलाया जा रहा था। जो दरअसल एक आतंकी ठिकाना था। इसके  अलावा मुदासिर उस कॉल सेंटर का संचालक था। उसने ही रविवार को डाउन टाउन हमले के बाद अपनी कार में पाकिस्तानी आतंकी को पनाहगाह तक पहुंचाया था। 

नेकां अध्यक्ष ने की निष्पक्ष जांच की मांग 
 नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारुक अब्दुल्ला ने उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से आग्रह किया है कि वह हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए मकान मालिक अल्ताफ व कॉल सेंटर संचालक मुदासिर के शव उनके परिजनों को दिलाने में मदद करें। इससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से बचेगी। एलजी ने उनकी मांगों पर गौर करने का आश्वासन दिया है। नेकां के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर बताया गया कि फारूक अब्दुल्ला ने उप राज्यपाल से बात कर घटना की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।

उमर ने उठाए सवाल
इस बीच, नेशनल कांफ्रेंल के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पुलिस स्वीकार करती है कि वे इमारत के मालिक (अल्ताफ) और किरायेदार (गुल) को इमारत में ले गए और दरवाजे खटखटाने के लिए उनका इस्तेमाल किया। फिर इन लोगों को आतंकवादी कैसे कहा जा सकता है?  

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आमिर के पिता ने डेढ़ दशक पूर्व आतंकी को किया था ढेर

रामबन में धारा 144 लागू
श्रीनगर के हैदरपोरा में हुई मुठभेड़ में रामबन निवासी व्यक्ति के मारे जाने पर विरोध की आशंका के बीच प्रशासन ने रामबन के कुछ हिस्से में धारा 144 लागू कर दी है। पुलिस के अनुसार रामबन के फमरोट गांव का रहने वाला मोहम्मद आमिर आतंकी था, जिसे हैदरपोरा मुठभेड़ में एक पाकिस्तानी आतंकी समेत मार गिराया गया। आमिर के परिवार ने उसे निर्दोष करार देते हुए इंसाफ की मांग की है। वहीं प्रशासन ने आमिर के परिवार व परिजनों की ओर से विरोध प्रदर्शन की आशंका पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट रामबन हरबंस लाल शर्मा ने संगलदान और सेरीपुरा में बुधवार सुबह 9 बजे से अगले आदेश तक धारा 144 लागू कर दी है। इस इलाके में पांच या इससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर सख्त पाबंदी रहेगी। पुलिस विभाग से कहा गया है कि आदेश को सख्ती से लागू करें।

आमिर के पिता ने डेढ़ दशक पूर्व आतंकी को किया था ढेर
मुठभेड़ में मारे गए आमिर के पिता लतीफ मागरे ने पंद्रह वर्ष पूर्व निहत्थे होने के बावजूद एक आतंकी को मार डाला था। मागरे ने कहा कि यदि सुरक्षा बलों के पास बेटे के खिलाफ सुबूत हैं तो उन्हें भी दिखाए जाएं, लेकिन वे जानते हैं कि उनका बेटा निर्दोष था। वह इंसाफ के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उप राज्यपाल उन्हें इंसाफ दिलाएं और बेटे का शव सुपुर्द-ए-खाक के लिए उन्हें सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी होने का उन्हें ये सिला मिला है। गौरतलब है कि पुलिस के अनुसार हैदरपोरा में आमिर समेत दो आतंकी मारे गए हैं। इस दौरान दो स्थानीय नागरिक भी मारे गए हैं, जो आतंकियों के मददगार थे। हालांकि आमिर के परिजनों की तरह ही श्रीनगर में अल्ताफ भट्ट और मुदासिर गुल के परिवार वाले भी सुरक्षा बलों के दावों को गलत बता रहे हैं। परिजनों का कहना है कि भट्ट और गुल निर्दोष थे।
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