जीआई टैगिंग के बाद कश्मीरी केसर की मांग 2023-24 में बढ़कर 18 एमटी हो गई है। जबकि 2020-21 में यह 8-10 एमटी थी। अब किसान को बेहतर लाभ मिल रहा है। और कुल 20 एमटी पैदावार में से 5 एमटी विदेश और 13 एमटी देश के विभिन्न राज्यों में जा रहा है।
कश्मीरी केसर की अंतरराष्ट्रीय मांग में जोरदार वृद्धि देखी गई है। जो जीआई टैगिंग के बाद और भी बढ़ गई है। 2020-21 में जहां केसर की मांग 8 से 10 मीट्रिक टन (एमटी) थी। अब 2023-24 में यह 18 एमटी तक पहुंच गई है। कुल 20 एमटी केसर की पैदावार में से 5 एमटी विदेशों में और 13 एमटी देश के विभिन्न राज्यों में बिक रही है।
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कृषि विभाग कश्मीर के अनुसार पहले विदेशों में 3 एमटी केसर बिकता था। लेकिन अब यह बढ़कर 5 एमटी हो गया है। देश के अन्य राज्यों में मांग 8 एमटी से बढ़कर 13 एमटी हो गई है। जीआई टैगिंग के बाद किसानों को बेहतर लाभ मिला है। जिससे केसर की कीमत 2 से ढाई लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। पहले बिचौलियों के माध्यम से बिक्री के कारण मांग कम थी। लेकिन अब किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
कश्मीर घाटी में 227 गांवों के 35 हजार से अधिक लोग केसर की खेती से जुड़े हुए हैं। जो उनकी रोजी-रोटी का मुख्य स्रोत है। सरकार भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए प्रयासरत है। और कृषि दायरे को बढ़ाने पर काम कर रही है।
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निदेशक कृषि विभाग कश्मीर मोहम्मद इकबाल चौधरी का कहना है की देश-विदेशों में केसर की डिमांड बढ़ी है। अब पैदावार बढ़ाने और कृषि दायरे को विस्तार देने पर काम हो रहा है। पहले आठ से दस एमटी मांग थी। अब 18 एमटी तक पहुंच गई है।