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Jammu: दिल्ली महंगी, लुधियाना भी दूर, जम्मू से निर्यात को चाहिए सीधा रास्ता; नई नीति से निर्यातकों को होगा लाभ

Mon, 28 Jul 2025 02:06 PM IST
शाहरुख खान गौरव रावत, अमर उजाला, जम्मू

सार

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, 2023-24 में जम्मू-कश्मीर से करीब 1,600 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जो देश के कुल निर्यात का सिर्फ 0.04 फीसदी था। 2024-25 में यह और घटकर 0.02 फीसदी रह गया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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प्रदेश की नई निर्यात नीति को लेकर सरकार मंथन कर रही है। कारोबारी वर्ग ने भी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रख दी हैं। कारोबारियों का कहना है कि जब तक ड्राई पोर्ट जैसी बुनियादी सुविधा, ढुलाई लागत में सब्सिडी और स्थानीय स्तर पर कस्टम क्लियरेंस नहीं मिलेगी, तब तक जम्मू-कश्मीर से निर्यात करना महंगा और कठिन बना रहेगा।
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व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इन सुधारों के बिना प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात प्रतिस्पर्धा में पिछड़ता रहेगा। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, 2023-24 में जम्मू-कश्मीर से करीब 1,600 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जो देश के कुल निर्यात का सिर्फ 0.04 फीसदी था। 2024-25 में यह और घटकर 0.02 फीसदी रह गया।

प्रदेश से सबसे ज्यादा ड्रग्स और फार्मा उत्पादों का निर्यात होता है। 2024-25 में प्रदेश के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी करीब 46 फीसदी रही। इसके बाद कार्बनिक-अकार्बनिक रसायन, चावल, हैंडीक्राफ्ट, कालीन, पश्मीना शॉल, सेब और ड्राई फ्रूट जैसे उत्पादों का भी निर्यात होता है। 
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नई नीति से निर्यातकों को मिलेगा लाभ
नई निर्यात नीति में ख्याल रखा जाएगा कि निर्यातकों को परेशानी न हो। उन्हें दूसरे प्रदेशों के निर्यातकों से प्रतिस्पर्धा करने में सहूलियत हो। नीति को सभी हितधारकों से बात करने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा। -अरुण मन्हास, निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य, जम्मू

ड्राई पोर्ट श्रीनगर नहीं, जम्मू में बनना चाहिए
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष ललित महाजन ने कहा, जम्मू में औद्योगिक इकाइयों की संख्या अधिक है, इसलिए यहां ड्राई पोर्ट की ज्यादा जरूरत है। श्रीनगर में बन रहा ड्राई पोर्ट अगर जम्मू में होता तो न सिर्फ उत्पाद भेजना सस्ता होता, बल्कि कच्चा माल मंगवाना भी आसान हो जाता। फिलहाल, कारोबारी दिल्ली और जालंधर के पोर्ट से माल निर्यात करते हैं। कंटेनर खाली लौटते हैं, जिससे लागत दोगुनी हो जाती है। ऐसे में सरकार को एकतरफा ढुलाई पर सब्सिडी देनी चाहिए।

निर्यात केंद्रित एमएसएमई पार्क बनाने की जरूरत
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष परवीन परगाल कहते हैं, जम्मू में निर्यात उन्मुख एमएसएमई यूनिट्स को बढ़ावा देने की जरूरत है। जम्मू देश के आखिरी कोने में है, जिससे माल लाने-ले जाने में लागत अधिक आती है। नई नीति में इस तथ्य को ध्यान में रखकर विशेष सहूलियतें दी जानी चाहिए।
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कस्टम ऑफिस और फ्रेट कॉरिडोर जरूरी
नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड के सदस्य संजय बंसल ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से प्रदेश को जोड़ने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि जम्मू में कस्टम क्लीयरेंस ऑफिस बननी चाहिए। बैंकों को लाइन ऑफ क्रेडिट की सुविधा देनी चाहिए। साथ ही, व्यापारियों के बीच निर्यात को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
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