दलाईलामा अपने एक माह के लद्दाख दौरे के समापन अवसर पर लेह के डिस्किट साल स्थित थुपसनलिंग गोंपा के नए अध्ययन केंद्र में दर्शकों को संबोधित कर रहे थे। धर्मगुरु ने कहा, राजनीतिक जिम्मेवारी से सेवानिवृत्त होने से पहले ही हमने बीच का रास्ता अपनाया है। अब हम तिब्बत के लिए सर्वसम्मत समाधान की मांग कर रहे हैं, जिसका रास्ता स्वायत्तता से होकर गुजरता है। हम पूर्ण स्वतंत्रता की जगह बुनियादी स्वयत्तता चाहते हैं ताकि अपनी पहचान, भाषा, समृद्ध बौद्ध सांस्कृतिक विरासत को बचा सकें। धर्मगुरु ने कहा कि ल्हासा में मुस्लिम समुदाय बेहद शांतिप्रिय है। धर्मगुरु ने बाद में सिंधु घाट पर विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए अहिंसा और करुणा को अपने जीवन में आत्मसात करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के जीवन से मार्टिन लूथर किंग और नेलसन मंडेला जैसे नेताओं ने सीखकर मिसाल कायम की है। आधुनिक शिक्षा में अहिंसा और करुणा को प्राथमिकता से शामिल करने की जरूरत है।
लद्दाख से अरुणाचल तक नालंदा परंपरा
धर्मगुरु ने कहा कि हिमालय क्षेत्र के लोग लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक नालंदा परंपरा की सुरक्षा और संरक्षण में अहम योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करना चाहिए।
आज दिल्ली रवाना होंगे धर्मगुरु
धर्मगुरु दलाईलामा शुक्रवार को लेह से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन के अनुसार दलाईलामा का काफिला सुबह 7.30 बजे जीवेत्सल से कुशोक बकुला एयरपोर्ट लेह के लिए निकलेगा। तीन साल बाद दिल्ली दौरा कर रहे दलाईलामा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय भी जा सकते हैं। लेह में अपने संबोधन में दलाईलामा ने इसका जिक्र करते हुए कहा था कि वे जल्द ही जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के शिक्षकों से आधुनिक शिक्षा में बदलाव को लेकर चर्चा करेंगे। धर्मगुरु ने कहा था कि आधुनिक शिक्षा भीतरी शांति का पाठ नहीं पढ़ाती। वे भीतरी शांति के लिए जरूरी सिद्धांतों को शिक्षा का हिस्सा बनाने के लिए सुझाव देंगे।