तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा है कि उनकी मांग चीन के भीतर सार्थक स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति को संरक्षित करने की है। चीन में रहने वाले आम लोग नहीं बल्कि कुछ कट्टरपंथी उन्हें अलगाववादी मानते हैं। चीन में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें यह अहसास है कि वह स्वतंत्रता की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि साथऺऱ़्क स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति के संरक्षण की मांग कर रहे हैं। सभी विवादों का बातचीत के जरिये हल निकालने की पैरवी करते हुए दलाई लामा ने कहा कि सभी इंसान बराबर हैं और उन्हें मेरा देश, मेरी विचारधारा वाली संकीर्ण सोच से ऊपर उठने की जरूरत है क्योंकि यही लोगों में लड़ाई का प्रमुख कारण है।
तिब्बती धर्मगुरु बारिश के बीच वीरवार को जम्मू पहुंचे। तिब्बती समुदाय के लोग बरसात की परवाह किए बगैर छतरी लिए उनकी अगवानी में जुटे रहे। जम्मू और लद्दाख में उनके दौरे को लेकर अनुयायियों में जबर्दस्त उत्साह है। जम्मू शहर में बारिश के बीच अनुयायी उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे।
वे वीरवार को जम्मू में रात्रि प्रवास करेंगे और अगले दिन शुक्रवार को लद्दाख चले जाएंगे जहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे लद्दाख में एक महीने से ज्यादा समय बिता सकते हैं। इससे चीन के और नाराज होने की आशंका है क्योंकि पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध चल रहा है।
कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद दलाईलामा की धर्मशाला से बाहर उनकी यह पहली यात्रा है। उन्होंने खुद को मैकलोडगंज स्थित आवास में आइसोलेट कर रखा था। इस दौरान उनका किसी से भी मिलना जुलना नहीं हुआ। दुनिया भर के अनुयायियों से वह वर्चुअल माध्यम से रूबरू होते रहे। पिछले महीने लद्दाख के बौद्ध संघ ने मैकलोडगंज में मुलाकात करके दलाईलामा को लद्दाख आने का निमंत्रण दिया था।
इससे पहले दलाईलामा ने 2018 में लद्दाख में अपना जन्मदिन मनाया था। उस दौरान भी चीन की तरफ से भारत के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया आई थी। इसी सप्ताह जब दलाईलामा के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी थी तो भी चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी।
तब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा था कि भारत को चीन के आंतरिक मामलों में दखल देने से परहेज करते हुए तिब्बत से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। भारत ने चीन की आलोचना को खारिज करते हुए कहा था कि दलाई लामा देश के सम्मानित अतिथि हैं।