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Dalai Lama in Jammu: आज जम्मू पहुंचे दलाई लामा, बोले- सार्थक स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति संरक्षित करना उनका प्रयास

Thu, 14 Jul 2022 03:51 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

धर्मशाला से लद्दाख जाने के लिए जम्मू पहुंचे दलाई लामा ने पत्रकारों से कहा कि चीन के कुछ कट्टरपंथी मुझे अलगाववादी और सुधार का विरोधी समझते हैं और हमेशा मेरी आलोचना करते हैं। अब अधिक संख्या में चीन के लोगों को अहसास हो रहा है कि दलाई लामा स्वतंत्रता नहीं मांग रहे हैं और उनकी इच्छा सिर्फ इतनी है कि चीन तिब्बत को सार्थक स्वायत्तता दे और तिब्बती बौद्ध संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित करे।
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Dalai Lama in Jammu - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा है कि उनकी मांग चीन के भीतर सार्थक स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति को संरक्षित करने की है। चीन में रहने वाले आम लोग नहीं बल्कि कुछ  कट्टरपंथी उन्हें अलगाववादी मानते हैं। चीन में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें यह अहसास है कि वह स्वतंत्रता की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि साथऺऱ़्क स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति के संरक्षण की मांग कर रहे हैं। सभी विवादों का बातचीत के जरिये हल निकालने की पैरवी करते हुए दलाई लामा ने कहा कि सभी इंसान बराबर हैं और उन्हें मेरा देश, मेरी विचारधारा वाली संकीर्ण सोच से ऊपर उठने की जरूरत है क्योंकि यही लोगों में लड़ाई का प्रमुख कारण है।

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धर्मशाला से लद्दाख जाने के लिए जम्मू पहुंचे दलाई लामा ने पत्रकारों से कहा कि चीन के कुछ कट्टरपंथी मुझे अलगाववादी और सुधार का विरोधी समझते हैं और हमेशा मेरी आलोचना करते हैं। लेकिन अब अधिक संख्या में चीन के लोगों को अहसास हो रहा है कि दलाई लामा स्वतंत्रता नहीं मांग रहे हैं और उनकी इच्छा सिर्फ इतनी है कि चीन तिब्बत को सार्थक स्वायत्तता दे और तिब्बती बौद्ध संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित करे।

 उनकी यात्रा को लेकर चीन की आपत्ति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह सामान्य है। चीन के लोग ऐतराज नहीं कर रहे हैं। अधिक संख्या में लोग तिब्बती बौद्ध धर्म में रुचि दिखा रहे हैं। उनके कुछ विद्वानों को अहसास हो रहा है कि तिब्बती बौद्ध धर्म बहुत वैज्ञानिक है। चीजें बदल रही हैं।
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उन्होंने श्रीलंका में मौजूदा संकट पर भी नाखुशी जाहिर की। कहा कि लोगों को मेरा मुख्य संदेश यही है कि हम सब भाई और बहन हैं और लड़ने का कोई मतलब नहीं है। लड़ाई संकीर्ण मानसिकता की वजह से तब होती है जब वे मेरा देश मेरी विचारधारा सोचना शुरू करते हैं। इंसानियत का तकाजा है कि हम सब साथ मिलकर रहें, चाहे हमें यह पसंद हो या नहीं। परिवार की तरह इसमें कुछ परेशानी हो सकती है जिन्हें बातचीत के जरिए सुझाया जा सकता है। 

बारिश के बीच एक झलक पाने को छतरी लेकर पहुंचे अनुयायी

तिब्बती धर्मगुरु बारिश के बीच वीरवार को जम्मू पहुंचे। तिब्बती समुदाय के लोग बरसात की परवाह किए बगैर छतरी लिए उनकी अगवानी में जुटे रहे। जम्मू और लद्दाख में उनके दौरे को लेकर अनुयायियों में जबर्दस्त उत्साह है। जम्मू शहर में बारिश के बीच अनुयायी उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे।

वे वीरवार को जम्मू में रात्रि प्रवास करेंगे और अगले दिन शुक्रवार को लद्दाख चले जाएंगे जहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे लद्दाख में एक महीने से ज्यादा समय बिता सकते हैं। इससे चीन के और नाराज होने की आशंका है क्योंकि पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध चल रहा है।

दो साल बाद धर्मशाला से बाहर पहली यात्रा

कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद दलाईलामा की धर्मशाला से बाहर उनकी यह पहली यात्रा है। उन्होंने खुद को मैकलोडगंज स्थित आवास में आइसोलेट कर रखा था। इस दौरान उनका किसी से भी मिलना जुलना नहीं हुआ। दुनिया भर के अनुयायियों से वह वर्चुअल माध्यम से रूबरू होते रहे। पिछले महीने लद्दाख के बौद्ध संघ ने मैकलोडगंज में मुलाकात करके दलाईलामा को लद्दाख आने का निमंत्रण दिया था।

लद्दाख में 2018 में मनाया था जन्मदिन

इससे पहले दलाईलामा ने 2018 में लद्दाख में अपना जन्मदिन मनाया था। उस दौरान भी चीन की तरफ  से भारत के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया आई थी। इसी सप्ताह जब दलाईलामा के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी थी तो भी चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी।

तब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा था कि भारत को चीन के आंतरिक मामलों में दखल देने से परहेज करते हुए तिब्बत से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। भारत ने चीन की आलोचना को खारिज करते हुए कहा था कि दलाई लामा देश के सम्मानित अतिथि हैं।

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