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चमलियाल दरगाह पर सूफी गायकों ने बिखेरी छटा

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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाबा चामलयाल की दरगाह पर सूफी कार्यक्रम में प्रस्तुति देता कलाकार।
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सांबा। रामगढ़ की भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट बाबा चमलियाल की दरगाह पर सोमवार को सूफी गायकों ने समा बांधा। इसे सुनने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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बाबा दलीप सिंह मन्हास की दरगाह चमलियाल में 23 जून को होने वाले मेले को यादगार बनाए जाने के लिए कमेटी प्रबंधकों की ओर से सूफी गायकों को निमंत्रण दिया गया। जिन्होंने सोमवार को अपनी मधुर आवाज से उपस्थित दर्शकों का मनोरजंन किया। मेले को यादगार बनाने के लिए जिला प्रशासन व दरगाह कमेटी के सदस्य हर संभव प्रयास कर रहे हैं। सोमवार को पूरे दिन लोगों का दरगाह पर आना जाना लगा रहा। मेला प्रबंधकों की ओर से लंगर आदि का भी प्रबंध किया गया है। बाबा चमलियाल मेले में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
बाबा चमलियाल की दरगाह पर मेले से पहले ही मेले जैसा माहौल बन चुका है। कई दिनों से बाबा की दरगाह पर 24 घंटे लंगर चल रहा है।
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सूफी कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज से बाबा दलीप सिंह मन्हास की चमत्कारी गाथाओं का बखान किया। बाबा की महिमा का गुणगान करने के लिए सूफी गाने व कव्वाली भी गाई, जिस पर श्रद्धालुओं ने जमकर तालियां बजाईं। बाबा चमलियाल क्लब यूनियन के युवा सुखदेव सिंह (सुखा) सोडी, सोनू, गारा राम, अंग्रेज पाल, बिल्लू चौधरी, शामा चौधरी, सन्नी चौधरी ने कहा कि रोजाना बाबा की दरगाह पर हजारों भक्त माथा टेकने और आशीर्वाद लेने आते हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 23 जून को मेला सजेगा। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सरहद पर बाबा चमलियाल की दरगाह तैयार है।
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बाबा की दरगाह के शक्कर शर्बत से वर्षों पुराने चर्म रोग 21 दिन में ठीक हो जाते हैं। आज भी दिन भर चर्म रोग से ग्रस्त लोग शरीर पर शक्कर शर्बत का लेप लगाते रहे।
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दस दिन से बाबा दलीप सिंह मन्हास की मजार पर सेवा का पुण्य कमाते व बाबा की दरगाह के पवित्र कुएं के पानी (शर्बत) तथा मिट्टी (शक्कर) का लेप अपने जख्मों पर लगाते हुए हरिद्वार से आए श्रद्धालु रंजन कुमार ने बताया कि जो दर्द कभी नासूर बन गया था। बाबा चमलियाल की दरगाह से शर्बत-शक्कर लगाने से दर्द से राहत महसूस की है। मान्यता के अनुसार बाबा की दरगाह से शर्बत-शक्कर लगाने से 21 दिन में चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है।
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चमलियाल मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर विभिन्न प्रकार की दुकानें सजने लगी हैं। इनमें चाट, मिठाइयां, प्रसाद और खिलौने की दुकानों के लिए दुकानदार दरगाह कमेटी की मदद से मेले में दुकान लगाने में व्यस्त हैं। दरगाह के गेट के बिलकुल सामने करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह से जलेबी, पकौड़े की दुकानों से भर गई है। सड़क से साइड पर बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व खिलौने की दुकानें लगाई जा रही हैं। इस बार मेले में टावर झूला, ब्रेक डांस, मौत का कुआं के साथ-साथ बच्चों के लिए इलेक्ट्रानिक खिलौने से लेकर फैंसी खिलौने में रिमोट गाड़ी, सुपरमैन गाड़ी, कार्टून कैरेक्टर, गणेश, छोटा भीम आदि खिलौने बच्चों को काफी पसंद आने वाले हैं।
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बाबा चमलियाल मेले में स्टेट टीबी कंट्रोल सोसायटी की ओर से टीबी के मरीजों की मुफ्त जांच की जाएगी। इसके लिए कोई भी अपनी सेहत की जांच करा सकता है। खांसी की शिकायत हो तो वह अपनी जांच करा कर मुफ्त उपचार कराएं।
बाबा चमलियाल के जयकारे से गूंजा पंडाल
रामगढ़। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाबा चमलियाल की दरगाह पर सोमवार को सूफी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बाबा के भक्तों ने कहा कि हर साल यह कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस साल यह दूसरा कार्यक्रम रहा, जिसमें निर्मल सूफ़ी, गुलशन जोगी ने सूफियाना गीत गाए। इसकी गूंज पाकिस्तान तक सुनाई दी। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाबा चमलियाल की दरगाह पर मेला शुरू हो गया है। हजारों भक्त रोजाना दरगाह पर माथा टेकने पहुंच रहे हैं। बाबा चमलियाल क्लब यूनियन के युवा सुखदेव सिंह (सुखा) बिल्लू चौधरी, सन्नी चौधरी, सोड़ी, सोनू, गारा राम, अंगरेज पाल, बिल्लू चौधरी, शामा चौधरी ने कहा कि बाबा की दरगाह पर हजारों भक्तों ने माथा टेका और बाबा का आशीर्वाद लिया। सुबह दस बजे से ही लोग गुलशन और निर्मल की आवाज सुनने के लिए पंडाल में बैठ गए। दोनों गायकों ने शाम चार बजे सूफ़ियाना गीतों की प्रस्तुति दी। गांव के युवाओं ने दरगाह पर लंगर लगाया।
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