आरएस पुरा। सीमावर्ती गांव सत्तोवाली में स्थित दुर्गा माता मंदिर में नव चंडी यज्ञ व संत सम्मेलन जोगिंदर शास्त्री की देखरेख में बुधवार को संपन्न हुआ। इस माैके पर भंडारा लगाया गया।
सम्मेलन के अंतिम दिन प्रात: जोगिंदर शास्त्री देखरेख में पहुंचे भक्तजनों ने मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां डालीं। इस मौके पर जोगिंदर शास्त्री ने कहा कि जब महिषासुर ने इस धरती पर प्रलय मचाया तो तब देवताओं ने उनका संहार करने का प्रयास किया लेकिन जब उन्हें सफलता नहीं मिली तो उन्होंने भगवान भोलेनाथ के दरबार में दोनों के संहार के लिए गुहार लगाई। तब भगवान भोलेनाथ एवं देवताओं के तेज से मां चंडी ने अवतार लिया और चंडी रूप धारण कर उन दैत्यों को दौड़ाया। शुंभ, निशुंभ इस नील पर्वत पर मां चंडी से बचकर छिपे हुए थे। तभी माता ने यहां पर खंभ रूप में प्रकट होकर दोनों का वध कर दिया। देवताओं के निवेदन पर माता इसी स्थान पर विराजमान हुईं और आदिकाल से अपने भक्तों का कल्याण कर रही हैं। इस दौरान साध्वी सुमित्रा ने मां दुर्गा की कथा सुनाई। इस दौरान पंडित श्याम सुंदर, स्वामी उमेशानंद, संत वीरेंद्र आदि ने भी भक्तजनों को प्रवचन सुना मंत्रमुग्ध किया।