ज्यौड़ियां। गांव भलवाल ब्राह्मणा में स्थित पांच सौ साल पुराने तालाब को अमृत सरोवर की सूची में शामिल किया गया है। इसको लेकर गांव के लोगों में खुशी है।
बताया जा रहा है कि अमृत सरोवर का शुरुआती विकास करते हुए ड्रेजिंग, बैंक, स्थिरीकरण, अतिक्रमण, ग्रेवाटर ट्रीटमेंट स्ट्रक्चर, उचित इनलेट का विकास, आउटलेट संरचना, उचित संघनन के साथ बांड का निर्माण और साइड स्लोप टर्फिंग, अमृत सरोवर के आसपास पौधरोपण गतिविधियों सहित जलग्रहण का उपचार करने को लेकर इस अमृत सरोवर पर लगभग बीस लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। लोगों का कहना है कि जिस तालाब का पानी पीकर गांव भलवाल ब्राह्मणा के लोग प्यास बुझाते रहे हैं, उसके अमृत सरोवर सूची में शामिल होने की खुशी है।
तालाब का इतिहास जानने के लिए अमर उजाला की टीम गांव भलवाल ब्राह्मणा में पहुंची। जहां गांव के बुजुर्गों और युवाओं से बातचीत की, जिसमें बुजुर्ग कृशन लाल, मदन लाल, इशर दास, पृथ्वी राम तथा कस्तूरी लाल आदि ने बताया कि यह तालाब पांच सौ साल पुराना है। इसका शुरुआती निर्माण गांव निवासी विद्या चंद के बेटों की तरफ से किया गया। विद्या चंद के दो बेटे तथा एक बेटी थी। बड़े बेटे का नाम बाबा चाफर और छोटे का नाम इशर दास था। उस समय गांव के आसपास पीने का पानी का कोई भी स्रोत नहीं था। तालाब के निर्माण में गांव के सभी लोगों ने कड़ी मेहनत की, और तालाब के निर्माण में काफी समय लगा। जब तालाब का मोक्ष, हवन और पूजन किया गया, उस समय इस क्षेत्र में अनाज का नामो-निशान नहीं था। बाबा चाफर कहीं बाहर के क्षेत्र से अनाज लाए और तालाब के किनारे पर मोक्ष, हवन और पूजन करनेे की तैयारी की, लेकिन प्रसाद ग्रहण करने वाला कोई नहीं मिला और बाबा चाफर ने तालाब के किनारे पेड़ के पत्तों से बनी पतलों पर प्रसाद परोस दिया। बाबा चाफर की सोच थी कि पक्षी, पशु और जीव जंतुओं ने अगर प्रसाद ग्रहण कर लिया तो मेरा किया कार्य सफल हो जाएगा।
गांव के लोगों ने बताया कि वर्ष 1965 से पहले तालाब ही पीने के पानी का स्रोत था। उसके बाद गांव में सरकार की तरफ से एक छोटा सा पानी का स्रोत बनाया गया। जहां से सभी गांव के लोगों को बांट कर पानी दिया जाने लगा। उसके बाद भी ज्यादातर लोग तालाब का ही पानी पीते थे। हम लोगों ने वर्ष 1995 तक तालाब का पानी पिया। इस तालाब से हमें 12 माह ठंडा और मीठा पानी मिलता था। गांव के सभी लोग तालाब को साफ सुथरा बनाये रखने में कड़ी मेहनत करते थे। गांव भलवाल ब्राह्मणा के लोगों के लिए यह तालाब पूजनीय है। तालाब के किनारे बैठ कर मांगी गई हर मन्नत पूर्ण होती है। गांव के लोग जब भी गांव से बाहर आते जाते हैं, तो तालाब पर नतमस्तक होकर जाते हैं।