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मोक्ष प्राप्ति का सबसे सहज साधन सत्संग

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अखनूर गांव बल्ले बाग मे आयोजित श्री भागवत कथा
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अखनूर। गांव बल्ले बाग में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि मनुष्य में यदि विवेक वैराग्य की निवृत्ति नहीं तो समझो सुख शांति व कल्याण की प्राप्ति भी नहीं। महापुरुषों का कथन है कि बिना सत्संग विवेक न होई, मोक्ष प्राप्ति का सबसे सहज साधन सत्संग है। तपस्या , त्याग आदि से भी भगवान उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने सत्संग से होते हैं। प्रगाढ़ प्रेम से सत्संग द्वारा ईश्वर को प्राप्त करना सबसे सरल उपाय है।
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शास्त्री ने समझाया कि मनुष्य सदैव सत्संग की अमृतधारा में डुबकी लगाता रहे तो अपने जीवन को सफल बना सकता है। सत्संग को निरंतर सुधार की प्रक्रिया माना जा सकता है, जो प्रेम और सद भावना से जीवन की वृत्तियों का परिमार्जन करता है। जीवन में एक बार यदि स्व सुधार का मार्ग मिल जाए आत्मा का लक्ष्य पूर्ण सकता है। जीवन में सुख-शांति, समृद्धि सत्संग से संभव है। जीवन विन के तमाम अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर हमें सत्संग से मिल जाते हैं। अत: मानव जीवन का महत्वपूर्ण अंग है सत्संग। जो हमारे विचारों को शुद्ध करते में सक्षम रहता है। इसके परिणाम में हमें आत्मिक शांति प्राप्त हो सकती हैं।
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