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बच्ची के अपहरण और दुष्कर्मी को मिली गुनाहों की सजा

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पांच साल की बच्ची के अपहरण और उसके दुष्कर्म के मामले में ट्रायल का सामना कर रहे अखनूर निवासी अश्विनी कुमार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी संजीव गुप्ता ने दस साल की कठोर सजा सुनाई है।
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जेएनएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 29 नवंबर, 2010 को बच्ची अपनी मां के साथ गांव बडयाल चक में एक शादी समारोह में गई थी। रात आठ बजे सभी बच्चे डांस आदि कर रहे थे।

तभी दोषी ने बच्ची को पास की दुकान से चाकलेट लेकर देने का लालच दिया। साथ ही कहा कि उसके पिता भी वहीं बैठे हैं। इसके बाद वह बच्ची को लेकर गांव के खेत में पहुंचा और उसके साथ दुष्कर्म किया।
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कठोर सजा के अलावा लगाया 25 हजार जुर्माना

बच्ची के रोने पर दोषी ने पहले डराया और उसके बाद उसे घर के पास छोड़ दिया। साथ ही धमकी दी कि किसी को बताया तो उसे मार देगा। रात को डर के मारे उसने किसी को कुछ नहीं बताया। अगली सुबह दर्द होने पर उसने अपनी मां को सारी बात बताई।

उसके बाद उसके अभिभावक अखनूर पुलिस स्टेशन पहुंचे और अश्विनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच पूरी की और अदालत में चालान पेश किया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी संजीव गुप्ता ने कहा कि महिला के खिलाफ इस तरह के केस, खासकर छोटी बच्चियों के साथ, समाज के लिए घातक हैं।

तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत धारा 376 और 511 पर सात साल की कठोर सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाती है। इसके अलावा धारा 363 के तहत तीन साल की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि जुर्माने की राशि जमा होने पर इसमें से 20 हजार रुपये पीड़िता के परिवार को दी जाए।
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