श्रीनगर। श्रीनगर में इस सप्ताह हुई नागरिकों की हत्या को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने मंगलवार को उन आतंकवादियों की पहचान कर ली है। हमलावरों में 25 वर्षीय सरगना बासित अहमद डार भी शामिल है, जो दक्षिण कश्मीर के कुलगाम का निवासी है। अधिकारियों के अनुसार अप्रैल में कुलगाम जिले के रेडवानी में अपने घर से गायब हुआ डार पहले भी जांच के दायरे में था, क्योंकि उसने द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के स्वयंभू कमांडर अब्बास शेख के साथ काम किया था।
अधिकारियों के अनुसार डार और उसके तीन अन्य साथी, जिनमें 20 साल की उम्र का एक युवक और शहर के नवा कदल का निवासी मेहरान शाला सहित एक अन्य युवक आदिल शामिल थे। ये चार सदस्यीय आतंकी दस्ते का हिस्सा थे, जिसने शहर में नागरिकों की हत्या को अंजाम दिया था। अधिकारियों ने बताया कि यह आतंकी समूह कश्मीरी पंडित व्यवसायी मक्खन लाल बिंदरू, स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की हत्या में शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों ने सभी स्थानों से सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए और नागरिकों, विशेष रूप से अल्पसंख्यकों की हत्या के लिए जिम्मेदार आतंकी ग्रुप तक पहुंचने में सफलता हासिल की है। अधिकारियों ने कहा कि बासित शहर में घूम रहा है और उसके साथ मेहरान और अन्य भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि घाटी में आतंकवाद के सबसे पुराने चेहरे में से एक अब्बास शेख की मौत के बाद डार ने टीआरएफ की कमान संभाली है।
कुलगाम के रामपुर गांव का निवासी शेख 90 के दशक के मध्य में प्रतिबंधित हिजबुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन में शामिल हो गया था और दो बार गिरफ्तार होने और रिहा होने के बाद भी आतंकी गुट में लौटता रहा। उसे पहली बार 2004 में गिरफ्तार किया गया था और एक साल बाद रिहा कर दिया गया था। 2007 में फिर से गिरफ्तार किया गया और चार साल जेल में बिताए। रिहाई के बाद 2014 के वसंत में फिर से लापता होने से पहले वह तीन साल के लिए घर पर था। उसे इस साल की शुरुआत में सुरक्षाबलों द्वारा एक ऑपरेशन में मार गिराया गया था। इस साल की शुरुआत में एक गैर कश्मीरी जौहरी सतपाल निश्चल की हत्या के पीछे शेख का हाथ था। घाटी में गोलगप्पे और चाट पापड़ी बेचकर अपनी रोटी कमाने वाले वीरेंद्र पासवान की हत्या के पीछे भी यही समूह हो सकता है।