हत्या मामले में गवाहों को अपने स्तर पर गढ़ने के आरोप में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी (आईओ) के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील याचिका खारिज कर कहा कि अभियोजन की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो गया है कि दो गवाहों को पूरी तरह से गढ़ा गया था। वह जानबूझ कर गवाही देने के लिए तैयार किए गए। इस लिहाज से यह मामला बेहद गंभीर हो जाता है। पुलिस महानिदेशक रामकोट में तैनात तत्कालीन पुलिस सब इंस्पेक्टर संजीत शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच सुनिश्चित करवाएं।
कठुआ जिले के बिलावर की निवासी रीता देवी की 6 मई 2010 को हुई हत्या मामले में न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायाधीश राहुल भारती ने आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले की अपील याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में गवाहों को ‘प्लांट’ किया गया, जो कि बेहद चिंताजनक बात है।
जांच अधिकारी ने गढ़े थे गवाह
खंडपीठ ने कहा कि हत्या के इस मामले को पूरी तरह से दो गवाहों के आधार पर तैयार किया गया, जो पुलिस ने अपनी तरफ से गढ़े थे। गवाहों में अंग्रेज चंद और राज कुमार को जांच अधिकारी ने भी प्लांट ेकिया। इसके पीछे पहली मंशा असल अपराधियों को बचाना हो सकती है या फिर जांच अधिकारी अभियोजन के लिए काबिल नहीं थे, इसलिए मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए गवाहों को कोर्ट के समक्ष गढ़ दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने गवाह तैयार कर बूढ़े मां-बाप और नाबालिग बेटी को इस केस में फंसाने का काम किया।