जम्मू। कश्मीर में आतंकवाद में संलिप्त लोगों पर दर्ज एफआईआर को एनआईए दोबारा खंगालेगी। एनआईए को शक है कि इन एफआईआर में शामिल युवाओं का आतंकी संगठन इस्तेमाल कर रहे हैं और इनसे टारगेट किलिंग कराने समेत आतंकी नेटवर्क की दूसरी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संभव है कि इन युवाओं में पत्थरबाज भी शामिल रह चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि एनआईए की 100 से अधिक अफसरों और कर्मियों की टीम इस वक्त कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद है, जो आतंकी नेटवर्क ध्वस्त करने में जुटी हुई है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि एनआईए आईबी, रॉ और एमआई जैसी खुफिया एजेंसियों की भी मदद लेगी। 2014 से लेकर 2018 तक कश्मीर में चार हजार युवाओं पर पत्थरबाजी करने का केस दर्ज किया गया था। एनआईए अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर पिछले दो महीने में एफआईआर में शामिल युवाओं का रिकॉर्ड देखेगी। उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से लेकर सोशल मीडिया अकाउंट तक की जानकारी जुटाई जाएगी कि यह लोग किस किसके संपर्क में रहे और इनकी गतिविधियां क्या थीं।
एनआईए को शक है कि टारगेट किलिंग में उक्त युवाओं का हाथ हो सकता है। पिछले 19 दिन में कश्मीर में 11 नागरिकों की हत्याएं हो चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि इन तमाम मामलों की जांच एनआईए को सौंपी जाएगी। फिलहाल दो मामलों की जांच एनआईए के पास है। अब एनआईए टारगेट किलिंग के लिए अन्य मामलों की जांच भी करेगी। इसके लिए एनआईए के और कर्मियों को कश्मीर भेजा जा सकता है।