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धरती का स्वर्ग कश्मीर, महिलाओं के लिए नर्क से कम नहीं

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घाटी में पारिवारिक हिंसा के कारण महिलाओं पर बढ़ता अत्याचार कश्मीरी समाज की एक बड़ी चिंता बन चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष में अब तक 610 ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें चार की मौत हुई है, जबकि 50 फीसदी से ज्यादा महिलाएं आत्महत्या करने के चलते 90 प्रतिशत झुलसी हैं।
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ऐसा ही एक मामला है श्रीनगर के रहने वाले नजीर अहमद का। वह एक ऐसी बदनसीब लड़की के पिता हैं, जिसने ससुराल वालों के अत्याचार से तंग आकर खुद को आग के हवाले कर दिया। वो भी अपने बेबस मजबूर पिता की आंखों के सामने।

बेटी को बचाने की कोशिश में नजीर अपने हाथ भी जला बैठा। नजीर की 25 साल की बेटी मारूफा आज भी श्रीनगर के स्टेट अस्पताल के बर्न वार्ड में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही है। मारूफा दो साल पहले डोली में बैठकर अपने घर से निकली थी, लेकिन कुछ ही महीनों के बाद वह अपने मायके लौट आई।
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उसके ससुराल वालों की दहेज की मांग पूरी नहीं हुई थी। इसके चलते उसके पति ने उसे घर से निकाल दिया और तलाक की बात करने लगा। इस पर नजीर ने मुआवजे के साथ साथ हक-ए-मेहर की मांग की।

लड़के ने कर ली दूसरी शादी

मगर उसे लड़की के ससुराल वालों की ओर से ठुकराया गया। इसके बाद नजीर ने अदालत का रुख किया। नजीर ने बताया कि लड़की की शादी के लिए पहले उसने जमीन बेच कर दस लाख का खर्च उठाया। फिर बाद में दो साल तक अदालत में भी इंसाफ पाने के लिए अपने घर की एक-एक चीज बेचकर यह लड़ाई लड़नी पड़ी।

उसने बताया कि उसकी बेटी दो महीने बाद ही ससुराल वालों के अत्याचार से तंग आकर घर लौट आई। पांच बेटियों के इस गरीब पिता के अनुसार, वह लड़की का पिता होने के कारण डर गया। आखिरकार कानून का सहारा लिया। उसने बताया कि 29 अप्रैल को लड़की के ससुराल वालों द्वारा किए गए वकील ने मेरी बेटी को बुलाकर उससे बताया कि लड़के ने दूसरी शादी कर ली है।

उसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने आत्महत्या का प्रयास किया। इस दौरान वह 70 प्रतिशत झुलस गई। महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ रहे एक एनजीओ की निदेशक कुरत-उल-ऐन मसूदी के अनुसार, समाज में बढ़ रही यह बीमारी ऐसी है कि हर कोई जिसके साथ यह घटना होती है वह इसे बयान नहीं करते। फिर भी हर दिन तीन से चार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।
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पांच महीनों में 600 से ज्यादा मामले

उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में ऐसी घटनाओं के आंकड़े 428 थे और सात की मौत हुई थी। मगर इस वर्ष केवल पांच महीनों के भीतर यह आंकड़ा 610 है, जिसमें से चार की मौत हो चुकी है। कुरत ने यह भी बताया कि हर दिन 3-4 परिवार उन्हें ऐसी घटना होने की खबर देते हैं।

केवल गरीब परिवार ही नहीं बल्कि पैसे वाले लोग भी यह अपराध करते हैं। उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार ऐसे मामलों को लेकर आंख मूंदे बैठी है। सरकार के पास ऐसी महिलाओं को फिर से बसाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।

वहीं राज्य के महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष शमीमा फिरदौस का कहना है कि जिस तरह से रोज अखबारों और मीडिया में खबरें आती हैं उसे देख तो साफ स्पष्ट हो जाता है कि कश्मीर में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ता जा रहा है। उन्होंने इसे काफी चिंताजनक बताया और कहा कि सरकार को इसके खिलाफ सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है।
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