फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

JK: बीफ पर सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा

विज्ञापन
विज्ञापन
गोवंश (बीफ) वध पर प्रतिबंध का मामला एक बार फिर अदालत में है। इसे अपराध की श्रेणी में रखने के खिलाफ दायर एक याचिका को सुनवाई के स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने बुधवार को बीफ पर बंदिश के प्रावधानों के बारे में राज्य सरकार को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) में गोवंश वध को अपराध की श्रेणी में रखने का प्रावधान है। कश्मीर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कानून के प्रोफेसर अफजल कादरी ने इन प्रावधानों के खिलाफ अपने वकील फैसल कादरी के माध्यम से रिट याचिका दायर की।

रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश मोहम्मद याकूब मीर और बंसी लाल भट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को यह नोटिस जारी किया है। फैजल कादरी के मुताबिक अदालत ने कहा है कि विधायिका चाहे तो वह आरपीसी के इससे संबंधित प्रावधान को निरस्त अथवा संशोधित कर सकती है। इसमें याचिका अड़ंगा नहीं होगी।
विज्ञापन

विज्ञापन

यह प्रावधान सीधे उनकी निजी स्वतंत्रता पर हमला

कादरी ने बताया कि उन्होंने आरपीसी के चैप्टर 15 की धारा 298-ए, 298-बी, 298-सी और 298-डी को चुनौती दी है। कादरी ने अपनी याचिका में कहा है कि ये धाराएं भारतीय संविधान की धारा 14,21,25 और 29 और जम्मू-कश्मीर के संविधान के खिलाफ हैं।

याचिका में कादरी ने कहा है कि यह प्रावधान सीधे उनकी निजी स्वतंत्रता पर हमला है और यह धार्मिक व निजी जीवन में घुसपैठ करने जैसा है। कादरी ने इन प्रावधानों को भेदभाव करने वाला और हानिकारक बताया और कहा कि यह प्रावधान एक व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करता है।

गौरतलब है कि कश्मीर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कानून के प्रोफेसर प्रो. अफजल कादरी ने डोगरा कानून के विलोपन की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। इस कानून के तहत रियासत में गोवंश वध की मनाही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें