सीलिंग प्रक्रिया, मालखाना रिकॉर्ड और एफएसएल भेजने में देरी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिला अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के मामले में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों की कड़ी (चेन ऑफ कस्टडी) को प्रमाणित करने में विफल रहा। मामला थाना बाड़ी ब्राह्मणा में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार नाै मई 2020 को पुलिस ने एक ट्रक से करीब डेढ़ किलोग्राम चूरा पोस्त (भुक्की) बरामद किया था। पंजाब के संगरूर निवासी कुलविंदर सिंह को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जब्त मादक पदार्थों की सीलिंग, सुरक्षित रख-रखाव और जांच के लिए एफएसएल भेजने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं रही हैं। नमूनों को दोबारा सील करने के बाद 29 दिन की देरी से फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) में भेजा गया जिसका कोई ठोस कारण पेश नहीं किया गया।
अभियोजन पक्ष मालखाना रजिस्टर भी प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे यह साबित नहीं हो पाया कि जब्त सामग्री सुरक्षित रूप से संरक्षित थी। गवाहों के बयानों में भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विरोधाभास सामने आया। अदालत ने यह भी माना कि मौके पर किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया। आवश्यक एफएसएल फॉर्म भी मौके पर नहीं भरा गया जो कि प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए जरूरी होता है। ऐसे में कोर्ट ने आरोपी कुलविंदर सिंह को बरी करते हुए मामला खारिज कर दिया।