जम्मू। जम्मू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोप में एक युवक को बरी कर दिया और कहा कि सहमति से बने संबंध बाद में अपराध नहीं माने जा सकते।
युवक पर आरोप था कि उसने विवाह का झूठा वादा कर युवती से शारीरिक संबंध बनाए और बाद में मुकर गया। यह फैसला न्यायाधीश अमरजीत सिंह लंगेह ने सुनाया है।
महिला थाना जम्मू में 11 जनवरी, 2019 को एक शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत के आधार पर पहले जांच हुई। इसके बाद अजय कुमार के विरुद्ध बिश्नाह पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ।
आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और गर्भपात से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया। हालांकि, गर्भपात की धारा बाद में हटा दी गई और मुकदमा केवल दुष्कर्म के आरोप पर चला।
सुनवाई के दौरान युवती ने अपनी बयान में कहा कि वर्ष 2014 में दोनों परिवारों की सहमति से उसकी सगाई हुई थी।
2017 में आरोपी अजय ने शादी से इन्कार कर दिया। इसके बाद में युवती की सगाई किसी और से हो गई। युवती ने कहा कि 2018 में आरोपी ने उसे अपनी भाभी के घर बुलाया और वहां कथित तौर पर शारीरिक संबंध बनाए।
मामले की पूरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि युवती 28 वर्षीय है और पढ़ी-लिखी है। उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह इतनी सरल और असहाय थी कि मना करने के बावजूद आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाए।
अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने महिला थाने में दर्ज शिकायत में कहीं भी यौन शोषण का जिक्र नहीं किया था, लेकिन एक महीने बाद अपनी बात बदल दी।
अदालत ने कहा कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि जब सहमति से बने संबंधों में दरार आती है तो उन्हें अपराध का रूप देकर आपराधिक कानून का सहारा लिया जाता है। ऐसा करना न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग है।