जम्मू। बहुचर्चित रोशनी भूमि घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने संबंधी मामले पर हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई है। यह मामला जांच के लिए सीबीआई के पास जाएगा या नहीं? इस पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल वाली खंडपीठ ने बुधवार को ओपन कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग में सुनवाई की। दोनों तरफ से वकीलों ने दलीलें पेश कीं। इस मामले की जांच करने वाले एंटी करप्शन कोर्ट की जांच पर हाईकोर्ट ने कड़ा एतराज भी जताया। कहा कि मामले की जांच धीमी चल रही है।
एडवोकेट अंकुर शर्मा ने 2014 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें बताया गया कि प्रदेश की 20 लाख कनाल जमीन पर माफियाओं, राजनेताओं, राजस्व अधिकारियों, पुलिस अफसरों का कब्जा है। रोशनी एक्ट के तहत यह जमीन कौड़ियों के भाव दी गई। लिहाजा इसकी सीबीआई जांच कराने के साथ रोशनी एक्ट को खत्म करना चाहिए। सीएजी की रिपोर्ट में भी यह खुलासा हुआ था कि रोशनी भूमि घोटाला हुआ है।
सुनवाई के दौरान एडवोकेट अंकुर शर्मा ने कहा कि इस मामले की जांच एसीबी कर रहा है, लेकिन जांच पर राजनीतिक दबाव का असर है। पिछले साल से एसीबी की जांच में अभी तक कुछ भी नहीं निकला है। ऐसे हालात में जांच सीबीआई को देनी चाहिए। जब से नेताओं, आईएएस अधिकारियों, मंत्रियों के नाम घोटाले में सामने आए हैं, तब से एसीबी की जांच कमजोर हो गई है। अंकुर ने सीएजी रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि 20 लाख कनाल जमीन के घोटाले से अनुमानित 25000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। खंडपीठ ने एसीबी, सरकार, जीएडी और लाभ लेने वालों की तरफ से दलीलें देने वाले वकीलों की बात सुनने के बाद कहा कि एसीबी की जांच बेहद धीमी है। एक तरह से जांच नहीं के बराबर हुई है। जीएडी ने भी इसमें सही काम नहीं किया। वह इस मामले पर कुंडली मारकर बैठ गया है। ऐसा लग रहा है कि जैसे आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
छह जिलों के उपायुक्तों ने रिकॉर्ड नहीं सौंपा
एडवोकेट एसएस अहमद ने कोर्ट के संज्ञान में लाया कि कितने आदेश हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर दिए हैं। हाईकोर्ट ने नाराजगी भी जताई। छह जिलों के जिला उपायुक्तों ने एसीबी को रिकॉर्ड देना था, जो नहीं दिया। प्रदेश के अकाउंटेंट जनरल ने भी आडिट टीम को सहयोग नहीं किया। एसीबी ने इस मामले में अब तक सिर्फ 2 एफआईआर में चालान पेश किया है। जबकि 10 एफआईआर अभी लंबित हैं। अहमद ने साफ कहा कि इस मामले में बड़े अफसरों, नेताओं, लोगों के नाम हैं, इसलिए एसीबी जांच नहीं कर रही। इसलिए जांच सीबीआई को देनी चाहिए। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।