बाबा गुलाम शाह बादशाह यूनिवर्सिटी (राजोरी) में असिस्टेंट प्रोफेसर उर्दू के लिए निकाले गए पदों की चयन प्रक्रिया पर फिलहाल हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी ने इस संबंध में 29 मई 2015 को विज्ञापन निकाला था।
याचिकाकर्ता डा, मुश्ताक अहमद वानी के वकील शेख शकील अहमद की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस जनक राज कोतवाल ने पाया कि याचिका में शिकायत यह है कि यूनिवर्सिटी ने 22 जुलाई 2011 में इस पद के लिए नोटिस निकाला था, लेकिन उसकी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
अब यूनिवर्सिटी ने फिर नया नोटिस निकाल दिया है। याचिकाकर्ता के अनुसार उसका चयन पहले वाली नोटिस में हुआ था, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा उसे एनओसी नहीं दिया गया, जहां वह तैनात हैं।
जस्टिस ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में इस मामले में अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। इस दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर के पद की चयन प्रक्रिया पर अदालत ने रोक लगा दी।
याचिका में कहा गया कि प्रतिवादी ने किस लिए उनके साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया, यह वही बता सकते हैं। अदालत से अपील की गई कि प्रतिवादी याचिकाकर्ता के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। इसलिए नए नोटिस को रद्द कर पुराने चयन को स्वीकार किया जाए। साथ ही प्रतिवादी को आदेश दिया जाए कि याचिकाकर्ता के पक्ष में नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।