इलाज के दौरान लापरवाही बरतने वाले डाक्टर को राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 4.35 लाख रुपये का मुआवजा मरीज को देने के आदेश दिए हैं।
पठानकोट से आकर जम्मू में विजिटिंग डाक्टर के रूप में इलाज करने वाले डा. वाईपी गंडोत्रा को आयोग ने आदेश दिए कि पीड़ित मरीज रेणू गुप्ता को मुआवजे की राशि तीन माह में अदा की जाए।
मरीज को शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में गॉल ब्लैडर से लैप्रोस्कोपिक आपरेशन के जरिये पथरी निकालने के लिए भर्ती किया गया था।
मरीज ने इसके लिए फीस भी अदा की, लेकिन डाक्टर ने 20 जून, 2000 को लैप्रोस्कोपिक आपरेशन की बजाय ओपन सर्जरी कर दी। 27 जून को उसे छुट्टी दे दी गई, जबकि रेणू ने ओपन सर्जरी के लिए कभी सहमति नहीं दी थी।
अदालत ने डाक्टर के उस तर्क को खारिज कर दिया कि जिसमें उन्होंने कहा कि लैप्रोस्कोपिक आपरेशन के दौरान सफल आपरेशन में समस्या आने से ओपन सर्जरी की गई, जबकि मरीज के लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी बेहतर थी।
इसमें उनकी लापरवाही रही। डाक्टर ने अपने बचाव में लिखित बयान में खुद स्वीकार किया है कि वह लैप्रोस्कोपिक आपरेशन नहीं कर पाए। ओपन सर्जरी में मरीज का सीबीडी पूरी तरह डैमेज हो गया।
दिल्ली के श्रेष्ठ अस्पताल में इलाज के बावजूद मरीज की स्थिति अच्छी नहीं हो पाई। इसके लिए शिकायतकर्ता ने दस लाख रुपये मुआवजा दिलाने की अपील की थी। निजी नर्सिंग होम के खिलाफ किसी तरह की लापरवाही साबित नहीं हुई। बहरहाल, कमीशन ने 4.35 लाख रुपये मुआवजा भरने के आदेश दिए।