इस टेस्ट में पीड़ित के खून का सैंपल लिया जाता है और इसकी आधे घंटे के भीतर रिपोर्ट आ जाती है। ऐसे समूह वाले स्थानों पर रैपिड टेस्ट से कोरोना संक्रमित मरीजों की तत्काल स्क्रीनिंग करने में मदद मिलती है। इसी तरह हॉट स्पॉट वे स्थान होते हैं जहां कम अवधि में तेजी से कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। इन जगहों पर भी मौके पर पहुंचकर संदिग्ध मरीजों के रैपिड टेस्ट करके उनकी पहचान की जाती है।
इस टेस्ट से प्राइमरी स्तर पर यह लाभ मिलता है कि सभी संदिग्धों को अस्पताल तक आने की जरूरत नहीं होती है। स्वास्थ्य विभाग रैपिड टेस्ट के लिए योजना तैयार कर रहा है। इसमें विभिन्न टीमों का गठन करना प्रस्तावित है, जो कलस्टर और हॉट स्पॉट स्थानों पर रैपिड टेस्ट को अंजाम देंगी। रैपिड टेस्ट के लिए भारत को पांच लाख किट मिल चुकी हैं, जिनमें जम्मू कश्मीर प्रदेश को भी किट भेजी जाएंगी।