कोरोना प्रोटोकाल का पालन कराने में जुटे 70 हजार पुलिसकर्मियों में से मात्र दो हजार पुलिस कर्मी ही कोरोना संक्रमित हुए हैं। इनमें से भी अधिकतर को अस्पताल नहीं ले जाना पड़ा और यह लोग घरों में रहकर ठीक हो गए।
कोरोना का सुरक्षा कवच इसका टीका ही है। इस बात का सबूत इससे ही मिलता है कि प्रदेश के सवा लाख पुलिस कर्मियों में से 97 हजार पुलिस कर्मियों ने कोरोना टीके के लिए पंजीकरण करा लिया है। 97 हजार पुलिस कर्मियों को पहली डोज लग चुकी है, जबकि 67 हजार को दूसरी डोज भी लग चुकी है।
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आईपीएस महिला अधिकारी एवं शहर की एसपी नार्थ मोहिता शर्मा कोरोना को मात देकर फिर से ड्यूटी पर लग गई हैं। गुरुवार को मोहिता ने अपना पद संभाल लिया। आते ही उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों और स्टाफ से बात की और कोरोना प्रोटोकाल को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
वैक्सीनेशन बहुत जरूरी
पिछले वर्ष कोरोना पॉजिटिव हो गया था। लेकिन कुछ दिन बाद ठीक हो गया। अस्पताल नहीं जाना पड़ा। इस बार वैक्सीन लगवा ली है। अब तक सब ठीक है। हमारे सभी कर्मियों ने भी वैक्सीन ली है। सबसे ज्यादा सड़कों पर लोगों से बात हमारी ही होती है। लेकिन वैक्सीन ने बहुत बचाया है। -मोहन कैथ, एसएपी ट्रैफिक रूरल
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पुलिस को गांव, बाजार, सड़क, चौक-चौराहे आदि पर रहना पड़ता है। बेशक दो हजार पुलिस कर्मी संक्रमित हुए, लेकिन वैक्सीन के कारण इन पर अधिक असर नहीं पड़ा। कुछ अफसर भी पॉजिटिव हुए, लेकिन कोरोना को हराकर फिर से ड्यूटी पर लौट आए हैं। -रमेश अंगराल, एआईजी पर्सनल, पुलिस मुख्यालय