मरीजों को भाई समझकर कर रहे हैं इलाज
डॉ एसपी मिश्रा, जौनपुर
जिले के स्वास्थ्य विभाग में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ एसपी मिश्रा ने कोरोना से अपने भाई को खो दिया। खुद भी संक्रमित हो गए। इसके बावजूद वह कोरोना मरीजों की सेवा में निरंतर डटे हुए हैं। उपचाराधीन मरीजों को कोविड अस्पताल का आवंटन हो या कंटेनमेंट जोन का निर्धारण। इसकी जिम्मेदारी डॉ. एससी मिश्र ही निभा रहे हैं। वह स्वास्थ्य विभाग के छह महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का भी चार्ज संभाल रहे हैं।
हर दिन सुबह कार्यालय पहुंचने पर कोविड पॉजिटिव मरीजों की संख्या का पता लगाते हैं। साथ ही तय करते हैं कि उन्हें किस कोविड अस्पताल में भेजना है। गांव वार कोरोना मामलों की संख्या देखते हैं और इसकी सूची तैयार कराकर संबंधित एसडीएम और बीडीओ को भेजते हैं, ताकि उसे कंटेनमेंट जोन बनाया जा सके। बताते हैं कि 12 अप्रैल को आरटीपीसीआर जांच में कोविड पॉजिटिव होने का पता चला और उस दिन से लेकर 26 अप्रैल तक वह आइसोलेट रहे।
वहां से ठीक भी नहीं हुए थे कि कोरोना के चलते 28 अप्रैल को परिवार की आर्थिक ताकत अपने बड़े भाई को गंवा बैठे। अपने भाई की तेरहवीं का कार्य पूरा कर 11 मई को ड्यूटी पर लौट आए। डॉ. मिश्र के मुताबिक हर मरीज को वह अपना भाई समझकर प्रयास कर रहे हैं, ताकि फिर किसी का भाई कोरोना से जान न गंवाने पाए।
सौ कोरोना गर्भवती महिलाओं के प्रसव में कर चुकी हैं मदद
शगुफ्ता आरा, श्रीनगर
देश भर के साथ-साथ जम्मू कश्मीर में भी कोरोना की जंग में अपना योगदान देने वाले कई ऐसे शख्स हैं जिन्होंने आगे आकर कोरोना मरीजों की मदद की है। ऐसी ही एक कोरोना योद्धा हैं श्रीनगर के जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल अस्पताल के नियोनेटोलॉजी विभाग की इंचार्ज नर्स शगुफ्ता आरा। इन्होंने पिछले डेढ़ साल में अस्पताल में करीब 100 गर्भवती महिलाओं के प्रसव में मदद की है।
आरा कोविड 19 की महामारी शुरू होने के बाद मार्च 2020 से नियोनेटोलॉजी विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं और उनका कार्य अन्य फ्रंटलाइन पैरा मेडिकल स्टाफ से विपरीत है क्योंकि इनका काम सबसे चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा है।
शगुफ्ता ने बताया कि गर्भावस्था में होना एक मां के लिए बहुत बड़ा इम्तिहान होता है और जो उस मां का इलाज कर रहा होता है उसके लिए उससे भी बड़ा इम्तिहान होता है। उन्होंने कहा कि एक गर्भवती मां का प्रसव कराना इन हालात में काफी चुनौतियों भरा कार्य होता है। इसलिए हम गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग करते हैं, क्योंकि मरीज को काउंसलिंग की जरूरत होती है। शगुफ्ता ने कहा कि हम उन्हें समझाते हैं कि यह इन्फेक्शन उन्हें प्रभावित नहीं करेगा, वह बच्चे को अच्छे से जन्म दे सकती हैं।
पहले ऑक्सीजन अब जरूरतमंदों को वेपोराइजर पहुंचा रहे हैं
अहसन रजा, शाहजहांपुर
एलएलबी छात्र अहसन रजा कोरोना संक्रमण से अपने हिस्से की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब तक लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर दिलाने में सहयोग करने वाले अहसन रजा अब जरूरतमंद लोगों तक वेपोराइजर (भाप की मशीन) उपलब्ध करा रहे हैं।
शाहजहांपुर शहर के मोहल्ला बाडूजई प्रथम के निवासी अहसन रजा मुश्किल वक्त में लोगों की मदद के लिए सामने आए हैं। वक्त जरूरत पर जब भी किसी को ऑक्सीजन सिलिंडर और भाप वाली मशीन की जरूरत होती है तो वह बिना समय देखे लोगों की मदद को निकल पड़ते हैं। सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से उनके पास उन लोगों की जानकारी आती है जो वेपोराइजर खरीदने में असमर्थ हैं। अहसन तुरंत उसकी मदद में पहुंच जाते हैं। अब तक कई लोगों को अहसन वेपोराइजर उपलब्ध करा चुके हैं।
अहसन रजा ने बताया कि ऐसे वक्त में जब ऑक्सीजन की मारामारी थी, तब उन्होंने प्रशासन से संपर्क कर कई लोगों को ऑक्सीजन दिलवाई थी। इससे पहले वह जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध करा रहे थे। अब कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोगों तक अपने खर्चे से भाप की मशीन पहुंचा रहे हैं।