श्रीनगर के जेएलएनएम अस्पताल में बतौर अनेस्थेटिस सेवा देने वाले डॉक्टर आरिफ ने स्वास्थ्य विभाग के नॉन-कोविड अस्पताल में ट्रांसफर के आदेश को नकारते हुए कोविड मरीजों की सेवा करने का फैसला लिया है। इस फैसले पर उप-राज्यपाल ने ट्वीट कर उनकी सराहना की।
कश्मीर के डॉक्टर सैयद आरिफ ने मानवता की मिसाल पेश की है। खुद कोरोना संक्रमित होने, जिंदगी और मौत के बीच की जंग जीतने के बाद कोरोना के मरीजों की सेवा करने के लिए आगे आए हैं। डॉक्टर आरिफ ने विशेष बातचीत में कहा कि पिछले वर्ष मार्च से उनके अस्पताल को कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया गया था। पांच महीने तक कोविड मरीजों का इलाज करने के बाद वह खुद कोरोना संक्रमित हो गए थे। उनका करीब 28 दिन तक अस्पताल में इलाज चला।
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डॉक्टर आरिफ ने बताया कि उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि बस वेंटीलेटर की कमी थी। वह शुरुआती कुछ लोगों में से थे जिन्हें प्लाज्मा थेरेपी दी गई। हालत बहुत खराब थी। लेकिन दुआओं से वह ठीक हो गए।
उन्होंने सितंबर में फिर से अस्पताल में कोविड मरीजों की सेवा करनी शुरू की। हाल ही में उन्हें नॉन-कोविड के लिए ट्रांसफर किया गया था लेकिन उन्होंने इसे नकारा और कहा कि अगर वह एक साल से काम कर रहे हैं तो अब क्यों पीछे हटें। उन्होंने कहा कि उनका यह सफर काफी डरावना रहा। लेकिन उनके मन में एक जज्बा है कोरोना मरीजों की सेवा करने का, इसलिए वह आगे आए हैं।