पिछले एक महीने से राज्य कैबिनेट की बैठक नहीं होने पर साझा सरकार के घटक दल कांग्रेस ने कड़ा रुख इख्तियार कर लिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज ने साफ कर दिया कि कैबिनेट और समन्वय समिति की बैठकों के अभाव में सरकार खुद गिर जाएगी, हम सरकार गिराने वाले नहीं।
कैबिनेट और समन्वय समिति की बैठकें नहीं होने से साझा सरकार की संवैधानिक सूरत ही नहीं रहेगी।
आखिर क्यों नहीं हो रही कैबिनेट बैठक
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में उमर उजाला से बातचीत में प्रो. सोज ने अपना यह नया रुख जाहिर किया। सोज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को धमकी नहीं दी है।
बतौर प्रदेश कांग्रेस और समन्वय समिति के अध्यक्ष उन्हें मुख्यमंत्री से यह जानने का हक है कि आखिर क्यों कैबिनेट की बैठक नहीं हो रही है।
उमर का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि पहाडि़यों को आरक्षण देने के ऐलान हो रहे हैं, इसका स्वागत है। मगर कांग्रेस ओबीसी को राज्य में चार फीसदी आरक्षण देने की वकालत कर रही है। इसमें कश्मीर और लद्दाख के तेली वर्ग को भी फायदा होगा।
'डेमोग्राफी में बदलाव इंसानी मसला'
पीओके रिफ्यूजियों के पुनर्वास पर कश्मीर में रियासत की डेमोग्राफी के बदलाव संबंधी भ्रम अथवा फैलाई जा रही आशंका पर प्रो सोज ने कहा कि यह गलत है। यह एक इंसानी मसला है। इसे इंसानी मदद और नजरिए से ही हल किया जाना चाहिए।
कांग्रेस सिर्फ स्टेट सब्जेक्ट होल्डर पीओके, 1965 और 1971 के रिफ्यूजियों के स्थायी पुनर्वास की मांग संबंधी प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने की मांग कर रही है। इससे राज्य सरकार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
आखिर पैकेज तो केंद्र सरकार को ही देना है। इसमें नेकां को कोई दिक्कत पेश नहीं आनी चाहिए क्योंकि कांग्रेस नान स्टेट सब्जेक्ट रिफ्यूजियों की बात नहीं कर रही है।
इसलिए कांग्रेस चाहती है कि जल्द कैबिनेट की बैठक में अवाम के हित में लंबित फैसले लिए जाएं।