उनका कहना है कि इस तरह के कैंप से केवल जेकेसीए के पैसे की बर्बादी होगी और जम्मू संभाग से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की अनदेखी होगी। उनका कहना है कि वह चेयरमैन और महासचिव के फैसले से खुद को अलग करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले 13 मई, 2014 और आठ जून, 2014 को जेकेसीए प्रधान डा. फारूक अब्दुल्ला के निर्देशों की जम्मू कश्मीर के प्रत्येक जिले में क्रिकेट शिविर आयोजित हो, ताकि रियासती टीमों का चयन किया जा सके, का भी उल्लंघन है।