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सरकार पर फैसला आज, राम माधव जम्मू पहुंचे

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पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की ताजपोशी का वक्त बुधवार तक मुकर्रर हो जाने के आसार हैं। यह तय हो चुका है कि पीडीपी-भाजपा का गठबंधन जारी रहेगा। बुधवार को सात दिन का राजकीय शोक खत्म होने के बाद शपथ ग्रहण की तारीख का एलान मुमकिन है।
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पीडीपी प्रवक्ता महबूब बेग ने श्रीनगर में पत्रकारों से कहा कि शोक और जश्न एक साथ नहीं चल सकते, इसलिए राजकीय शोक खत्म होने के बाद ही सरकार बनेगी। गठबंधन में अहम किरदार निभाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव भी मंगलवार को अचानक जम्मू पहुंचे और पार्टी नेताओं से मंत्रणा की।

विधायकों के साथ भी बैठक की। उनके साथ प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना भी थे। माना जा रहा है कि पिता के नक्शे कदम पर चलने को प्रतिबद्ध महबूबा फिलहाल सरकार या निजाम में कोई बड़ा उलटफेर नहीं करेंगी।
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दोनों पार्टियां उस एजेंडा आफ एलायंस पर संतुष्ट हैं

उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार तक रियासत में महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में नई सरकार का गठन हो जाएगा। पीडीपी प्रवक्ता महबूब बेग ने रियासत में सरकार बनाने को लेकर चल रहे सस्पेंस पर पूछे गए सवाल पर कहा कि उनका मानना है कि ये कोई सस्पेंस नहीं है।

हमने मुफ्ती मोहम्मद जैसे कद्दावर नेता को खोया है इसलिए जो भी उनसे परिचित थे सभी सदमे में हैं चाहे वो पीडीपी हो या फिर आम लोग। उन्होंने कहा कि मुफ्ती साहब ने गठबंधन के समय जो भी एजेंडा आफ एलायंस रखा होगा उस पर अमल करने की पूरी कोशिश रहेगी।

राजकीय शोक बुधवार को खत्म हो रहा है। जल्द ही महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होगा जो मुफ्ती साहब के नक्शे कदम पर चलेगी।

भाजपा द्वारा रखी गई शर्तों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह सब बेबुनियाद बातें हैं क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनावों के बाद इस गठबंधन को बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।

काफी सोच समझ कर गठबंधन बनाया गया था ताकि सरकार छह वर्षों का कार्यकाल पूरा कर सके। दोनों पार्टियां उस एजेंडा आफ एलायंस पर संतुष्ट हैं और कोई नई शर्त नहीं होगी।
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सांसद कर्रा ने गठबंधन जारी रखने का विरोध किया

पीडीपी नेता तथा श्रीनगर से सांसद ताहिक हमीद कर्रा ने मंगलवार को भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने का विरोध किया है। दावा किया कि यह राज्य के लोगों को स्वीकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में नई सरकार कांग्रेस सहित अन्य धर्मनिरपेक्ष पार्टियों की मदद से बनाई जानी चाहिए। मौजूदा हालात में भाजपा-आरएसएस के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है।

ऐसे में महबूबा को कांग्रेस से बातचीत का रास्ता खोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर मतभेद रहा है लेकिन पार्टी या महबूबा के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है।
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