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शहर के कचरे से तैयार की जाएगी बायो सीएनजी

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जम्मू। मंदिरों के शहर जम्मू का कचरा भी अब आय और ईंधन का साधन बनेगा। अब तक कचरा निस्तारण बड़ी समस्या है, लेकिन नगर निगम की एक परियोजना के मूर्त रूप लेते ही यह कचरा एक साथ कई समस्याओं का समाधान बन जाएगा। कचरे से सवा सौ टन बायो सीएनजी यानी जैविक कंप्रेस्ड नेचुरल गैस बनाई जाएगी। प्रदूषण रहित यह ईंधन शहर में इस्तेमाल होने पर स्मार्ट सिटी का प्रदूषण कम होगा। सीएनजी आय का साधन भी बनेगी।
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स्मार्ट सीटी परियोजना जम्मू के कचरे की साइट को भगवती नगर के बजाए अब कोट भलवाल किया गया है। कोट भलवाल में कचरा रिसाइकल करने के लिए नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन आफ इंडिया (नैफेड) की मदद ली जाएगी। नैफेड को राष्ट्रीय स्तर पर कचरा निस्तारण और प्रसंस्करण में खासी महारत हासिल है। इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत इस परियोजना पर 74 करोड़ की लागत से काम पूरा किया जाना है। इसमें नगर निगम 20 करोड़ खर्च करेगा और परियोजना से होने वाले लाभ में 50 फीसदी हिस्सेदारी नगर निगम की होगी।
परियोजना के लिए शोध करने वाले केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के पर्यावरण विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पंकज मेहता ने बताया कि जम्मू शहर से प्रति दिन 400 मिट्रिक टन कचरा इकट्ठा किया जाता है। इसे रिसाइकल कर बायो सीएनजी तैयार की जाएगी। इसका उपयोग गाड़ियों में किया जा सकेगा। इससे प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। इस परियोजना के लिए नगर निगम के छन्नी हिम्मत, त्रिकुटा नगर आदि क्षेत्रों में शोध किया है। यह क्षेत्र तीसरे जोन में आते हैं। शोध के अध्ययन में पाया गया है कि इस क्षेत्र में 50 फीसदी ऊर्जा और 50 फीसदी कमपोस्ट की क्षमता है।
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इंदौर की तर्ज पर बन रहा जम्मू शहर
विशेषज्ञ के अनुसार शहर के जोन तीन में शोध किया है। यहां लोग घरों से सब्जी, अंडे या बाकी वेस्ट को फेंक देते हैं। इस सामग्री से खेतों के लिए खाद तैयार की जा सकती है। जम्मू शहर में इंदौर की तर्ज पर कचरा प्रबंधन परियोजना शुरू होगी। तवी नदी और नहरों में जाने वाली गंदगी को भी कचरा प्रबंधन प्रक्रिया में लाया जाएगा।
जल्द तैयार हो जाएगा प्लांट
नगर निगम की आयुक्त अवनी लवासा ने कहा कि जल्द ही गैस जनरेटेड प्लांट तैयार किया जाएगा। नैफेड ने इसकी परियोजना ली है। उसके बाद कचरे को रिसाइकल करके बायो सीएनजी तैयार की जाएगी। शहर में प्रदूषण को कम करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।
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