पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के कार्यवाह अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्विटर पर लिखा कि किसी भी प्रदेश की बेहतरी के लिए आवश्यक है कि मुख्यमंत्री पर भरोसा किया जाए।
यदि ऐसा नहीं है तो प्रदेश सरकारों को हटाकर कर सीधे केंद्र से ही सत्ता चलानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मसर्रत आलम की रिहाई मामले में जवाब देते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने मसर्रत आलम को रिहा करने से पहले केंद्र सरकार से इस मसले पर चर्चा नहीं की थी और न ही कोइ जानकारी केंद्र को दी गई थी।
उमर ने ट्विटर पर लिखा कि भगवान जानता है कि मैं जरा भी मुफ्ती सईद के हक की बात नहीं कर रहा हूं पर एक मुख्यमंत्री पर भरोसा करना ही चाहिए और प्रदेश की बेहतरी के लिए क्या सही है अथवा क्या नहीं, यह फैसला करने का अधिकार मुख्यमंत्री को होना चाहिए।
उमर ने लिखा. 'क्या सही है इसका फैसला करने के लिए अगर आप मुख्यमंत्री पर विश्वास नहीं कर सकते हैं तो बेहतर यह होगा कि राज्य सरकार को हटा दिया जाए और दिल्ली से सीधे शासन किया जाए।'
उमर ने आगे लिखा कि मुफ्ती भाजपा से गठबंधन और खोखले न्यूनतम साझा कार्यक्रम से हटकर काम करना चाहते हैं और अब तक की अपनी रणनीति में वह सफल हुए हैं।