जम्मू। जिले में यूक्रेन से लौटे विद्यार्थी परिवार से मिलकर खुश हैं, तो वहीं अपने अन्य साथियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित भी हैं। उनका कहना है कि अभी बड़ी संख्या में विद्यार्थी यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं। वह मदद का इंतजार कर रहे हैं। वहां युद्ध वाले इलाकों में हालात काफी खराब हैं।
तोप शेरखानिया निवासी साहिब शर्मा 3 मार्च को यूक्रेन से जम्मू लौटे हैं। वह माता वैष्णो देवी का आशीर्वाद पाने के लिए परिवार के साथ शुक्रवार को कटड़ा गए। साहिब ने बताया कि वह उजरोड बार्डर पर एक संस्थान में एमबीबीएस दूसरे वर्ष के छात्र हैं। हालात खराब होने पर यूक्रेन से 27 फरवरी को निकलकर हंगरी पहुंच गए थे। वहां एक दिन रुकने के बाद जम्मू पहुंचे।
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यूक्रेन में जल्द हालात सामान्य हो जाएंगे। पिता संजीव कुमार और माता ज्योति बाला ने कहा कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं किया जा सकता है। दोनों देशों को वार्ता करके उचित हल निकालना चाहिए। हमें खुशी है कि हमारा बेटा सकुशल लौट आया है। उम्मीद करते हैं कि बाकी सभी विद्यार्थी भी सकुशल वापस आएंगे।
सुंजवां नवाबाद निवासी अदनान नवाज चौधरी भी 3 मार्च को यूक्रेन से जम्मू लौटे। यूक्रेन में विनतस्या नेशनल मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रहे अदनान बताते हैं कि वह 26 फरवरी को विनतस्या शहर से 21 विद्यार्थियों के साथ एक निजी वाहन से निकले थे। इस दौरान 20 घंटे का सफर तय करके सोलवाइकल बार्डर पर भारतीय राजदूत से संपर्क किया। अगले दिन उन्हें बार्डर पार कराया गया। विद्यार्थियों को होटल, खानपान की सुविधा मुहैया करवाई गई। इसके बाद उन्हें पैतृक स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि जब वह विनतस्या शहर से निकले थे, तब वहां पर रूस की ओर से दो बार एयरस्ट्राइक हो चुकी थी, लेकिन वह बाहरी क्षेत्र में की गई थी। हम जरूरी दस्तावेज वहीं पर छोड़ आए हैं। वहां अभी भी सैकड़ों विद्यार्थी फंसे हैं। मेरे समूह में 15 सहपाठी हैं। युद्ध की परिस्थितियों में वहां हालात सामान्य होने पर सुरक्षित स्थानों पर दोबारा पढ़ाई शुरू करने या विद्यार्थियों के पड़ोसी देशों में शिफ्ट करने का प्रावधान होता है।