पूर्व मंत्री चौधरी लाल सिंह
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छात्र नेता के तौर पर चौधरी लाल सिंह ने की थी सियासी सफर की शुरुआत
चौधरी लाल सिंह ने राजनीति की शुरुआत छात्र नेता के तौर पर की थी। वह तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। पहली बार 1996 में कठुआ की बसोहली सीट से कांग्रेस टिकट पर विधायक बने। 2002 में भी वह यहां से जीते और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने। स्वास्थ्य मंत्री बनने के दौरान भी वह खूब सुर्खियों में रहे।
उधमपुर की सीट से दो बार बने सांसद
इसके बाद साल 2004 और 2009 में उधमपुर की सीट से जीत कर लाल सिंह लोकसभा पहुंचे। साल 2014 में कांग्रेस की तरफ से टिकट न मिलने के चलते उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया। इसके बाद वह कठुआ में एक समारोह में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
भाजपा और पीडीपी सरकार में बने मंत्री
फिर 2014 में बसोहली से भाजपा के टिकट पर उन्होंने फिर जीत दर्ज की। तब जम्मू कश्मीर राज्य में भाजपा और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई। वह एक बार फिर मंत्री बने। इस बार वह वन मंत्री बनाए गए।
2018 में कठुआ में नौ साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या का मामले में एक रैली में शामिल होने पर चौधरी लाल सिंह पर आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। विवाद के परिणामस्वरूप लाल सिंह ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद भाजपा और चौधरी लाल सिंह में दूरी बढ़ती गई।
पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए वह सीबीआई जांच की अपनी मांग पर अड़े रहे और इस मांग के लिए बड़ी-बड़ी रैलियां निकालीं। आगे चलकर उन्होंने खुद की पार्टी बनाई, जिसे डोगरा स्वाभिमान संगठन पार्टी नाम दिया। अभी वह भाजपा के खिलाफ आक्रामक नजर आते हैं। उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का समर्थन किया था, लेकिन एक विवाद के चलते वह इस यात्रा से नदारद रहे।