राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा है कि तिब्बत चीन का हिस्सा नहीं है। यह बात चीन को मान लेनी चाहिए। इस मामले में भारतीय राजनेताओं को भी हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि इस मामले को सुलझाया जा सके।
तिब्बत पर चीन का कोई हक नहीं। भारत को भी चीन को समझने में कोई भूल नहीं करनी चाहिए। चीन भारत का दोस्त नहीं हो सकता।
जम्मू के प्रेस क्लब में लद्दाख फांदे छोकस्पा संस्था की ओर से हिमालय की सुरक्षा में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर आयोजित सेमिनार में इंद्रेश ने कहा कि चीन ने अपनी पूरी सीमा पर 4500 किलोमीटर तक लंबा रेल लिंक स्थापित कर अपने लाखों सैनिक तैनात किए हैं।
वह बार्डर पर खुद को बहुत ज्यादा मजबूत कर रहा है। भारत को यह बात समझनी चाहिए। भारत को चाहिए कि भारत चीन बार्डर पर अपनी पोस्टें बढ़ाए और जवानों की संख्या को भी बढ़ाया जाए, ताकि कुछ होने पर चीन को जवाब दिया जा सके।
वहीं निर्वासित तिब्बती सरकार की गृह मंत्री डोलमा गैरी का लद्दाख को लेकर दर्द झलका। उन्होंने लद्दाख के लिए सहयोग मांगा और तिब्बत के लिए भी सहयोग मांगा।
राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने कहा कि भारत हर क्षेत्र में चीन से सक्षम है। भारत सरकार समय-समय पर तिब्बत को लेकर चीन से बात करती है।
रिटायर्ड बिग्रेडियर सुचेत सिंह, संस्था के अध्यक्ष रिनछेन टुण्डुप और महामंत्री ताशी सम्फैल ने भी सेमिनार में अपने विचार रखे।