सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कई वर्षों में बाद सक्रिय आतंकियों की संख्या दो सौ से कम रह गई है। प्रदेश की जनता ने यह दर्शाया है कि यहां अलगाव और बंदूक की संस्कृति का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की संख्या दो सौ से कम होना बड़ी उपलब्धि है।आतंकियों की संख्या में कमी जम्मू-कश्मीर पुलिस, बीएसएफ, सीआरपीएफ और सुरक्षा बलों के अथक प्रयास का फल है।
पीएलए के साथ बाकी इलाकों की मुक्ति के लिए भी वार्ता की प्रक्रिया जारी
उत्तरी कमान ने एलओसी, एलएसी, एजीडीएल और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखा और आंतरिक सुरक्षा पर भी कड़ी निगरानी रखी। पूर्वी लद्दाख के मुश्किल इलाकों में सैनिकों ने चीन के पीएलए के साथ कई इलाकों की मुक्ति को सकारात्मक रूप से अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि पीएलए के साथ बाकी इलाकों की मुक्ति के लिए भी वार्ता की प्रक्रिया जारी है।
सैनिक हमेशा की तरह अब भी चौकस व पूर्ण रूप से तैयार
सेना ने बर्फीली चोटियों पर सतर्कता बरकरार रखी है। यह वीर सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और दृढ़ संकल्प का जीता जागता उदाहरण है। ऑपरेशन स्नो लेपर्ड अब भी बरकरार है। सैनिक हमेशा की तरह अब भी चौकस व पूर्ण रूप से तैयार हैं।
पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ जारी
सैन्य कमांडर जोशी ने कहा कि एलओसी पर एक वर्ष से चल रहे सीजफायर से सीमा क्षेत्र में रहने वालों की दिनचर्या और जीवनशैली में बहुत सुधार हुआ है। हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से आतंकी घुसपैठ की कोशिश अब भी की जा रही हैं।
इनको सैनिक विफल कर रहे हैं। सैनिकों की मदद के लिए तकनीकी का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है। स्टेट ऑफ द आर्ट टेक्नोलॉजी को पूर्ण रूप से सेना में शामिल किया जा है। बीते वर्ष में कश्मीर घाटी में सुरक्षा और स्थिरता के सभी मापदंडों में बहुत सुधार हुआ है।
निस्वार्थ भाव से सेना लोगों की कर रही सेवा
पहले की तरह उत्तरी कमान ने सरकारों के साथ मिलकर जनता की मदद का बीड़ा उठा रखा है। हम कोरोना महामारी के खिलाफ साथ हैं, और निस्वार्थ सेवा भाव से मदद करने के लिए तत्पर हैं। मार्च 2020 से अब तक सेना के स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना देश सेवा व नागरिक सेवा की है।