आस्था के महापर्व छठ का आज चौथा और अंतिम दिन है। जम्मू-कश्मीर में छठ का पर्व धूमधाम से मनाया गया। वीरवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस व्रत का संपन्न हुआ। इससे पहले तीसरे दिन बुधवार की शाम को व्रतियों ने अस्ताचलगामी (अस्त होते हुए) सूर्य का अर्घ्य दिया। शहर के बिक्रम चौक स्थित सूर्य पुत्री तवी नदी किनारे बने घाट में काफी संख्या में व्रती पहुंचे थे। इस दौरान सूर्य उपासना कर सुख-समृद्धि की मंगल कामना की गई। इस दौरान घाट लोक गीतों से गूंज उठे।
छठ के दौरान पूूजा करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
छठ के तीसरे दिन सुबह व्रती महिलाओं ने पूजा-अर्चना की और दोपहर बाद तवी नदी किनारे पहुंची। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक लोकगीतों के साथ सूर्य की उपासना की। अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देकर उन्हें परिवार के लिए सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। महिलाएं फल, फूल, मिठाइयां और अन्य पूजन सामग्री से सजे थाल लेकर तवी किनारे पहुंची थीं। इस दौरान व्रती महिला इंदु देवी ने बताया कि परिवार के साथ जम्मू में रहते हैं। हर साल छठ व्रत रखती हैं। घर जैसा माहौल तो नहीं है, लेकिन फिर भी अच्छा आयोजन होता है। काफी संख्या में महिलाएं आती हैं। छठ पर्व का बिहार में बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होगा। गौरतलब है की सोमवार को नहाए-खाए के साथ इस पर्व की शुरुआत हुई थी।
छठ के दौरान पूूजा करती महिलाएं।
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सूर्य को अर्घ्य देने की मान्यता
तवी किनारे बनाए गए तटों पर पूजा के लिए पहुंची महिला श्रद्धालुओं ने बताया कि छठ पर्व पर पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि को दिया जाता है। यह अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाता है। इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और ये अर्घ्य उन्हीं को दिया जाता है।