भगवान शिव के पावन सावन माह में आगामी 19 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) पर दशनामी अखाड़ा से छड़ी मुबारक रवाना होगी। इसमें भूमि पूजन और ध्वजारोहण की रस्म अदा की जाएगी। जिला अनंतनाग के मार्तंड सूर्य मंदिर में पूजन के साथ उसी दिन छड़ी मुबारक वापस दशनामी अखाड़ा पहुंचेगी।
गत दो जुलाई को शुरू हुई यात्रा में अब तक 1.70 लाख भक्त पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं। पारंपरिक रिति रिवाजों के अनुसार व्यास पूर्णिमा पर भूमि पूजन, नवगृह पूजन और ध्वजारोहण का खास महात्म्य है।
छड़ी महंत दीपेंद्र गिरि के अनुसार यात्रा में शामिल होने से पूर्व छड़ी मुबारक श्रीनगर के विभिन्न मंदिरों में जाएगी। दो अगस्त को शंकराचार्य मंदिर में होती हुई छड़ी मुबारक डाउनटाउन श्रीनगर स्थित हरि पर्वत पर शारिका भवानी मंदिर में पहुंचेगी। छड़ी स्थापना और ध्वजारोहण समारोह का पांच अगस्त को दशनामी अखाड़ा में पहुंचकर सात अगस्त को पारंपरिक छड़ी पूजन होगा।
छड़ी मुबारक 13 अगस्त को यात्रा में शामिल होगी। पहलगाम की लिद्दर नदी में पूजा और विसर्जन के बाद छड़ी मुबारक दशनामी अखाड़ा पहुंचेगी। उन्होंने सरकार से छड़ी मुबारक के लिए पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की।
गौरतलब है कि दशनामी अखाड़ा के महंत दीपेंद्र गिरि और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के बीच यात्रा अवधि को लेकर सहमति नहीं रही है। महंत दीपेंद्र गिरि यात्रा के पारंपरिक शेड्यूल पर जोर देते रहे हैं।