शिक्षा विभाग के चीफ एजुकेशन आफिसर (जम्मू) तरसेम लाल की अग्रिम जमानत को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सीईओ को विजिलेंस ने विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया है। सीईओ ने हाईकोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी, जिसे वीरवार को जस्टिस धीरज चौधरी ने दोनों पक्षों की तरफ से बहस सुनने के बाद खारिज कर दिया। सीईओ तरसेम लाल का एक दिन पहले ही तबादला हुआ है।
सीईओ की तरफ से एडवोकेट बीएस सलाथिया और मिनाक्षी सलाथिया ने पक्ष रखा और स्टेट की तरफ से एएजी गगन बसोत्रा ने पक्ष रखा। शिक्षा विभाग में 90 प्रतिभागियों के चयन में सीईओ द्वारा धांधली करने के आरोप में विजिलेंस ने सीईओ पर मामला दर्ज करते हुए उनको गिरफ्तार किया था। इसमें सीईओ ने 15 प्रतिभागियों को बिना आवेदन ही नियुक्त कर दिया। 13 प्रतिभागियों के नंबर फर्जीवाड़े से बढ़ाए गए और 6 ऐसे प्रतिभागियों को इंटरव्यू में पास किया, जिनके नंबर काफी कम थे।
स्टेट की तरफ से पक्ष रखते हुए एएजी गगन बसोत्रा ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच बहुत आवश्यक है। ऐसे में सीईओ को जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है। इस पर अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस धीरज चौधरी ने कहा कि जमानत अजी दाखिल करने वाले सीईओ की ओर से कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज उनके केस को समर्थ नहीं करते। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
(जेएनएफ)