सीबीआई ने गुरुवार को जम्मू, श्रीनगर, दिल्ली समेत देशभर में 14 जगहों पर छापेमारी की। जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीबीआई ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।
सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के करोड़ों रुपये की रिश्वत की पेशकश के आरोपों के संबंध में दर्ज दो प्राथमिकी के मामले में वीरवार को छह राज्यों में 14 ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें जम्मू, श्रीनगर, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, केरल के त्रिवेंद्रम, बिहार के दरभंगा में कार्रवाई की गई। जम्मू में आईएएस अधिकारी नवीन चौधरी (प्रधान सचिव, कृषि उत्पादन और किसान कल्याण) के गांधीनगर स्थित सरकारी आवास पर दबिश दी गई। उनसे कई घंटे पूछताछ की गई और कई दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
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एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट और कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना से संबंधित 2260 करोड़ रुपये के घोटाले में दो मामले दर्ज किए हैं। सीबीआई के मुताबिक, एफआईआर दर्ज करने के बाद एजेंसी ने छह टीमें गठित की थी। इन्होंने इस मामले में गहन जांच के बाद एक साथ इन 14 ठिकानों पर छापे मारे। सीबीआई ने जांच का कदम जम्मू-कश्मीर सरकार के आग्रह पर उठाया है। जांच एजेंसी इस मामले में मौजूदा समय में मेघालय के राज्यपाल मलिक से भी पूछताछ कर सकती है।
सीबीआई की एक टीम ने जम्मू रेलवे स्टेशन स्थित चिनाब वैली प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के कार्यालय पर भी छापा मारा। इसके अलावा अन्य अफसरों के घरों पर भी तलाशी ली। पूर्व राज्यपाल मलिक ने आरोप लगाया था कि उन्हें दो फाइलों को हरी झंडी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। इन दो मामलों में पहला मामला जम्मू-कश्मीर कर्मचारी स्वास्थ्य देखभाल बीमा योजना का है। इस योजना का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया और इसके लिए 60 करोड़ रुपये जारी हुए। दूसरा मामला कीरू जलविद्युत परियोजना का है।
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2019 में इसके लिए 2200 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया। आरोप है कि निदेशक मंडल ने 28 जून, 2019 को अपनी 47वीं बैठक में निर्णय लिया था कि ठेके देने के लिए ‘कागजी निविदा प्रक्रिया’ पर आधारित प्रस्ताव को ‘ई-निविदा’ के पक्ष में रद्द कर दिया जाए। हालांकि, अगस्त 2019 में हुई अगली बैठक में बोर्ड ने फैसला बदल दिया और ठेका दे दिया।
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- फोटो : social media
तत्कालीन प्रदेश सरकार ने घटाई थी परियोजना की राशि
यह आरोप लगाया गया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को 13 जून, 2016 को अधिकारियों द्वारा 4,640.88 करोड़ की लागत से अनुमोदित किया गया था, जिसे बाद में अनुमति के साथ 4,708.60 करोड़ तक संशोधित किया गया था। तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार ने छूट पर विचार करने के बाद राशि को घटाकर 4,287.59 करोड़ कर दिया था। इसमें से 1,166.31 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण, भवन, संचार, स्थापना और अन्य संबंधित कार्यों के लिए थे। बाकी के संबंध में, 3,121.28 करोड़ की स्वीकृत लागत और 2,994.89 करोड़ की वास्तविक लागत के बीच का अंतर 126.39 करोड़ था। इस प्रकार प्रदान की गई लागत स्वीकृत लागत से चार फीसदी कम थी। इसलिए प्रदान की गई लागत और स्वीकृत लागत के बीच अंतर 151.95 करोड़ का है, जो कि 3.5 फीसदी कम है। यह भी आरोप है कि मुख्य ठेकेदार जिसे परियोजना का 75 फीसदी प्रदान किया गया था, उसने स्वीकृत 7.45 फीसदी की लागत पर अनुबंध लिया। लागत में समग्र कमी इसलिए आई क्योंकि अन्य दो ठेकेदारों ने स्वीकृत लागत से काफी कम कीमत उद्धृत की थी।
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इन अधिकारियों के आवासों पर भी मारे छापे
प्राथमिकी में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस और त्रिनिटी री-इंश्योरेंस बुकर्स लिमिटेड, आईएएस अधिकारी और पावर प्रोजेक्ट के पूर्व चेयरमैन नवीन कुमार चौधरी, प्रबंध निदेशक एम एस बाबू और दो निदेशक एम के मित्तल व अरुण मिश्रा के नाम हैं। आरोप है कि बोर्ड मीटिंग में इन अधिकारियों ने मिलीभगत कर ई-टेंडर समेत कई नियमों को अनदेखा कर ठेका पटेल इंजीनियरिंग को दे दिया। इन सभी के आवासों को टीम ने खंगाला।
मलिक का दावा, 300 करोड़ की रिश्वत की पेशकश मिली
23 अगस्त 2018 से 30 अक्तूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक ने सनसनीखेज दावा किया था कि उन्हें राज्य के दो बडे़ प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। पहला प्रोजेक्ट अंबानी समूह से जुड़ा था। उनका दावा था कि दूसरा मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े व्यक्ति का है जो महबूबा मुफ्ती की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री था। उन्होंने कहा था कि रिश्वत की पेशकश के बाद उन्होंने दोनों प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया और मामले की जांच करने को कहा।