जम्मू के नगरोटा के पास गुज्जरों के पशु रोके जाने के मामले में जिला प्रशासन कैंप लगाकर टैगिंग कर रहा है। इस दौरान 500 पशुओं की टैगिंग की गई, जिनमें से 200 पशुओं और उनके मालिकों के साथ आगे जाने की अनुमति दे दी गई। शनिवार को कैंप जारी रहा।
कैंप में सहायक आयुक्त जनरल मनिशा अंगराल, तहसीलदार बाबू राम, नायब तहसीलदार पृथ्वी शर्मा और उनकी टीम मौके पर मौजूद रही। वहीं पशुपालन विभाग से डॉक्टर संजय और उनकी टीम, पुलिस विभाग की तरफ से भी डीएसपी नगरोटा मिर्जा सुल्तान और एसएचओ विश्व प्रताप सिंह थे।
बता दें, वीरवार को हिंदू संगठन ने गुज्जर परिवारों पर पशु तस्करी का आरोप लगा पुलिस बुला ली थी। इस मामले को लेकर बवाल हो गया था। इस दौरान फैसला हुआ था कि कैंप लगाकर जांच की जाएगी। इसके बाद आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।
प्रशासन ने 80 गुज्जर परिवारों के 2447 पशुओं को रोक रखा है, जिनमें से 500 की टैगिंग कर 200 को मालिकों के साथ भेज दिया। कैंप में एक ही डॉक्टर होने के चलते पशुओं की टैगिंग में समस्या आई। गुज्जर परिवारों का आरोप है कि अगर और डॉक्टर होते तो यह काम जल्दी हो सकता था।
2001 के सरकारी नियमों के मुताबिक बिना मुख्य पशुपालन अधिकारी की अनुमति के कोई भी पशुओं को इधर-उधर नहीं ले जा सकता। इन सभी गुज्जर परिवारों के पास मोटो है, लेकिन अनुमति नहीं है । गो रक्षक संगठन के कुशल शर्मा ने सरकार के कैंप लगाने के कदम को ऐतिहासिक करार दिया है।
उनके अनुसार ऐसा पहले किसी ने भी नहीं किया। लग रहा है जैसे सरकार पशुओं के अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है। सेव एनिमल वेल्यु इन्वायरनमेंट एनजीओ की रिंपी मदान ने कहा कि यह कदम अच्छा है।
सबसे बड़ा यहां सवाल यह है कि पशुपालन विभाग के अनुसार सभी पशुओं की टैगिंग हो गई है तो फिर यह कौन से पशु हैं, जिनकी आज तक टैगिंग नहीं हुई। मुख्य पशुपालन अधिकारी सय्यद अल्ताफ ने अनुसार लगभग 4 लाख पशुओं का आंकड़ा उनके पास है। लगभग 3 लाख पशुओं की टैगिंग हो गई है ।