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यहां जनता को नहीं भाते ज्यादा पढ़े लिखे प्रत्याशी

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साल 2008 में हुए जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में मतदाताओं पर करोड़पति प्रत्याशियों का जादू ज्यादा नहीं चल पाया था। 152 उम्मीदवार पिछले विधानसभा चुनाव में ऐसे थे जो करोड़पति थे।
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उम्मीदवारों ने नामांकन भरते समय अपनी संपत्ति का ऐसा ब्योरा दिया था, जिसमें उनके करोड़पति होने का प्रमाण था, लेकिन रियासत के मतदाताओं पर करोड़पति प्रत्याशियों का असर कम ही देखने को मिला और 152 करोड़पति प्रत्याशियों में से मात्र 21 ही विधानसभा चुनाव में जीत का स्वाद चख सके थे।

इसी तरह स्नातक या इससे ज्यादा पढ़े-लिखे प्रत्याशी भी रियासत के उम्मीदवारों को ज्यादा पसंद नहीं आए थे।

कुल 1014 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया था

जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले विधानसभा की बात करें तो कुल 1014 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया था। इनमें से 308 प्रत्याशी स्नातक या इससे ऊपर तक पढ़े थे, लेकिन मतदाताओं ने ऐसे मात्र 39 मतदाताओं को ही जीत दिलाई।

इसके अलावा जीत हासिल करने वाले जमा दो या इससे आसपास तक ही पढ़े थे। कुछ प्रत्याशियों ने अपना पढ़ाई का लेखा जोखा ही प्रस्तुत नहीं किया था तो कुछ आठवीं और दसवीं ही पास किए थे। राजनीति में आपराधिक छवि के नेता न हों, ऐसा संभव नहीं हो सकता।

आगे मतदाताओं की परख है कि उन्हें जिताना है या हराना। जम्मू-कश्मीर में हुए पिछले विधानसभा चुनावों की बात करें तो घोषित आपराधिक मामलों के 44 उम्मीदवारों ने अपना भाग्य आजमाया था, जिनमें मतदाताओं ने छह को हरी झंडी दिखाकर विधानसभा में भेजा।
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29 ऐसे उम्मीदवारों को जीत दिलाई

38 उम्मीदवारों को मतदाताओं ने रिजेक्ट कर दिया था। इसी तरह घोषित गंभीर आपराधिक मामलों के साथ 27 उम्मीदवारों ने टिकट हासिल किया था, लेकिन मतदाताओं ने मात्र दो ही उम्मीदवारों को जीत का स्वाद चखाया।

बाकी के 25 प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था। पिछले चुनाव में जिन उम्मीदवारों ने अपना पैन घोषित नहीं किया था, उनकी संख्या कुल 1014 उम्मीदवारों में से 823 थी। मतदाताओं ने इनमें से 29 ऐसे उम्मीदवारों को जीत दिलाई थी।
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