भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग को प्रधानमंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के तहत स्वीकृत 500 करोड़ रुपये से अधिक के धन का उपयोग करने में विफ ल रहने के लिए फटकार लगाई है। इस राशि का उपयोग केंद्रशासित प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उच्च सुरक्षा प्रणाली की खरीद पर करना था।
सामान खदीदने में विफल रहने के लिए गृह विभाग को लताड़
सरकारी लेखा परीक्षा निकाय ने बताया कि परियोजना के तहत 56 वस्तुओं और कार्यों की खरीद और स्थापना की जानी थी और जिनमें से 33 वस्तुओं और कार्यों की खरीद(59 प्रतिशत) विभाग द्वारा अगस्त 2020 तक पूरी की गई थी। इसने 31 अगस्त 2020 तक एकीकृत कमांड सेंटर और उससे जुड़े घटकों के निष्पादन के लिए लेने में विफल रहने के लिए गृह विभाग को लताड़ लगाई।
पुलिस स्टेशनों के लिए 413 सीसीटीवी की खरीद
इसी तरह पुलिस स्टेशनों के लिए 413 सीसीटीवी की खरीद अगस्त 2020 में भी निविदा प्रक्रिया के तहत थी। कैग ने कहा कि विभिन्न प्रकार के 669 वाहनों (बुलेटप्रूफ बंकर, रक्षक वाहन, जिप्सी, दंगा रोधी वाहन, हाइड्रोलिक क्रेन, जेसीबी, ट्रैक्टर) को मंजूरी दी गई थी। इनमें केवल 547 की खरीद की गई थी जिनमें से 499 वाहनों को अगस्त 2020 तक वितरित किया गया था।
100.27 करोड़ रुपये की खरीद बिना टेंडर के
रिपोर्ट में कहा गया कि 100.27 करोड़ रुपये की खरीद (जिसमें वाहन, बॉडी प्रोटेक्टर, बुलेटप्रूफ पटका, दंगा रोधी वाहन, फ ार्म ट्रैक ट्रैक्टर और लोडर शामिल हैं) पुलिस मुख्यालय द्वारा या तो रिपीट ऑर्डर के आधार पर या मूल निमार्ताओं से बिना निविदाओं को आमंत्रित कर और दरों की तर्कसंगतता का पता लगाए बगैर किया गया।