जम्मू। करीब 10 साल पहले हुर्रियत की हड़ताल के दौरान हिंसा, पत्थरबाजी और हत्या की कोशिश के मामले में बरजुल्ला के सात आरोपियों को बरी कर दिया गया है। चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रीत सिमरन कौर की अदालत ने मंगलवार को फैसला दिया। बुरहान वानी की मौत के अगले दिन हुर्रियत की ओर से हड़ताल का आह्वान किया गया था।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकारी वकील बिना शक आरोपियों का गुनाह साबित करने में नाकाम रहा। सबूत देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि अभियोजन के गवाहों ने लगभग 100 से 200 लोगों की भीड़ के बारे में बात की लेकिन कोई पहचान परेड नहीं की गई और न ही स्वतंत्र आम गवाह से पूछताछ हुई। केवल घटनास्थल पर आरोपियों की मौजूदगी व पत्थर मिलने से अपराध साबित नहीं होता।
अदालत राज्य बनाम शमीम अहमद सोफी और अन्य के मामले में सुनवाई कर रही थी। श्रीनगर के सदर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार नौ जुलाई 2016 को हुर्रियत ने हड़ताल का आह्वान किया था। आरोप है कि स्थानीय मस्जिद से घोषणा के बाद भीड़ एकत्र हो गई और उसने पुलिस पर पत्थर फेंके।
मामले में शमीम अहमद सोफी, जहूर अहमद वानी, आबिद गुल, मुंजीर मकबूल गनी, बिलाल अहमद डार उर्फ गुगरू, मंजूर अहमद डार और दानिश अब्बास जरगर के खिलाफ ट्रायल चल रहा था। कोर्ट ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया। जेएनएफ