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Jammu News: 2016 का पीएचसी चयन सही, अभ्यर्थी की चुनौती खारिज, ट्रिब्यूनल ने कहा-केवल शक सबूत की जगह नहीं ले सकता

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जम्मू। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की जम्मू बेंच ने कंबाइंड कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन-2016 में फिजिकली चैलेंज्ड कैटेगरी (पीएचसी) के तहत किए गए चयन को सही ठहराया है। बेंच ने अभ्यर्थी की उस चुनौती को खारिज कर दिया जिसमें चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति निरस्त करने की मांग की गई थी।
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प्रशासनिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा और राम मोहन जोहरी की बेंच ने फैसला दिया है। नियुक्ति को चुनौती राजेंद्र सिंह निवासी तहसील रामनगर (उधमपुर) ने दी थी। कैट ने 11 फरवरी को मामला रिजर्व कर लिया था।

आवेदक ने 24 अगस्त 2020 में जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग की ओर से पीएचसी श्रेणी के तहत अभ्यर्थियों के चयन में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उसने 23 अक्टूबर 2019 और 2 सितंबर 2020 के आदेश को भी रद्द करने की मांग की जिसके तहत निजी प्रतिवादियों को नियुक्ति दी गई थी। इसके अलावा कट ऑफ डेट के बाद जारी अक्षमता समेत अन्य प्रमाण पत्रों पर सवाल उठाया था।
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प्रतिवादियों ने दलील का विरोध करते हुए कहा कि आवेदक को 1083.28 अंक मिले थे जबकि पीएचसी लोकोमोटिव कैटेगरी में आखिरी चुने गए अभ्यर्थी को 1119.22 अंक मिले थे।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि एक बार जब कोई अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर चयन में नहीं आता तो वह सिर्फ इस आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि उसने चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था या वह आरक्षित श्रेणी से है। चुने गए अभ्यर्थियों की जांच तय मेडिकल बोर्ड ने की थी।

आरोप को खारिज करते हुए कैट ने कहा कि केवल शक सबूत की जगह नहीं ले सकता। 2016 का चयन 2008 के एसआरओ 387 के तहत था न कि 2018 के एसआरओ 103 के तहत, जिसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता था। जेएनएफ
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